मार्टीनगंज ब्लाक के महुजा नेवादा गांव में स्थित अठरही माता का मंदिर काफी पुराना है। ग्रामीणों के अनुसार एक समय बहुत भयंकर बाढ़ आई, जिसमें गोरखपुर जिले के कई गांव बह गए। लोग किसी तरह अपनी जान बचाकर आजमगढ़ चले आए और कुरथुआ गांव में डेरा डाल दिए। इसी में जटाम नाम का व्यक्ति माता का भक्त था।
उन्हें गन्ने की पेराई के लिए एक कोल्हू चाहिए था। जटाम बाजार गए और कोल्हू खरीदने एक दुकान पर पहुंचे और महाजन से एक कोल्हू का दाम पूछा तो महाजन बोला आप दूसरा कोल्हू ले जाओ आप से यह नहीं जा पाएगा। बाबा जटाम उसी कोल्हू को ले जाने की जिद पर अड़ गए। कई बार प्रयास किया। लेकिन असफल रहे। फिर कोल्हू की पांच परिक्रमा कर जंगल में मां की खोज में निकल पड़े।
भूख प्यास सताने लगी तो जंगल में एक पेड़ के नीचे सो गए। सुबह होने पर वे वहां से चल दिए, भूख-प्यास बढ़ती जा रही थी। उसी समय लकड़ी बिनते हुए एक बुढ़िया इनके पास आकर बोली बाबा कहां जाना है, बताओं में रास्ता बता दूं। बुढ़िया ने पूछा तुम कहां जा रहे हो, जिसे तुम खोज रहे हो वह मैं ही हूं। बाबा ने कहा कि मैं कैसे मान लूं, इस पर मां ने बाबा को दर्शन दिए और एक पत्थर देकर कहा कि इसे कोल्हू में छुआ देना, कोल्हू उस स्थान पर पहुंच जाएगा जहां इसे तुम ले जाना चाहते हो, वहां पहुंच जाएगा।
माता ने कहा कि इस पत्थर के साथ मैं भी तुम्हारे गांव चल रही हूं। इस पर बाबा ने कहा मां मैं अकेले आप की सेवा कैसे कर पाऊंगा। तब मां ने कहा कि तुम्हारे साथ अठ्ठारह गांव के लोग मुझे पूजेंगे और मैं अठरही माता के नाम से जानी जाऊंगी। तब से आज तक इस स्थान पर पूजन-अर्चन को लोगों की भीड़ उमड़ती है।