पुरानी कोतवाली में चल रही श्रीरामलीला की वजह से मोहर्रम की सातवीं का जुलूस नहीं निकालने का निर्णय लिया गया। कोतवाली परिसर में गुरुवार को आयोजित शांति कमेटी की बैठक में लिए गए इस ऐतिहासिक निर्णय का प्रशासन और पूजा समिति वालों ने स्वागत किया है। जुलूस और रामलीला मंचन को लेकर प्रशासन के हाथपांव फूले हुए थे। खूफिया विभाग के लोग दोनों पक्षों से हल निकालने के लिए काफी दिनों से प्रयास में जुटे थे।
पुरानी कोतवाली में वर्षों से श्रीरामलीला का मंचन होता है। इसी रास्ते से मोहर्रम का जुलूस भी निकलता है। इस वर्ष मोहर्रम के सातवीं का जुलूस 21 अक्तूबर को निकलना है। इसी दिन नवरात्र की नवमी भी है। नवमी के दिन की रामलीला और मोहर्रम के सातवीं का जुलूस इन दोनों को लेकर प्रशासन परेशान था। गुुरुवार को इस मामले का हल निकालने के लिए कोतवाली में एएसपी नगर विनोद कुमार की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गई।
इस अवसर पर एसडीएम सदर भी मौजूद थे। इन लोगों के समक्ष शहर के विभिन्न अखाड़ों के उस्ताद मुन्ना कुरैशी, मुख्तार, अब्दुल अजीज खां, सलीम अहमद, शिया कमेटी के अध्यक्ष चुन्नू हुसैन ने ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए सातवीं का जुलूस 21 के बजाय रीति-रिवाज से दूसरे दिन निकालेंगे। इस फैसले का बैठक में मौजूद अधिकारियों के साथ-साथ पूजा कमेटी के दीनू जायसवाल, रामकृष्ण मिश्रा, संत प्रसाद अग्रवाल, राधेमोहन गोयल आदि ने भी स्वागत किया।
इस पर श्रीरामलीला समिति के संयोजक विभाष सिन्हा ने भी 21 की रात को ही मंच खोल देने का आश्वासन दिया
। इस पर सभी लोगों ने सहमति जताई। इसी के साथ प्रशासन की मुश्किल भी आसान हो गई। शहर कोतवाल मो. ईसा खां ने बताया कि अखाड़ा वालों ने एकता की मिसाल पेश करते हुए साहसिक निर्णय लिया है। दोनों पक्ष के लोगों ने लिखापढ़ी कर अपनी सहमति जताई है।