उत्तर प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी जनसुनवाई प्रणाली (आईजीआरएस) पर शिकायतों के निस्तारण में लापरवाही और फर्जीवाड़े का गंभीर मामला सामने आया है।
आजमगढ़ जिले के आरटीआई एक्टिविस्ट पतरू राम विश्वकर्मा ने डीएम से आईजीआरएस पोर्टल पर जमीन विवाद की जांच रिपोर्ट अपलोड करने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है।
पतरू ने बताया कि 6 जुलाई को उन्होंने डीएम को एक शिकायती पत्र सौंपा था। इसमें उन्होंने श्री सांगवेद संस्कृत महाविद्यालय, हनुमानगढ़ी, आजमगढ़ में एक सहायक अध्यापक की नियुक्ति प्रक्रिया की गहन जांच की मांग की थी।
इस प्रार्थना पत्र को 7 जुलाई को आईजीआरएस पर दर्ज किया गया था। शिकायतकर्ता को 8 जुलाई को एसएमएस के माध्यम से सूचित किया गया कि उनकी शिकायत जांच के लिए एसडीएम सगड़ी को भेज दी गई है।
11 अगस्त को शिकायतकर्ता को शिकायत निस्तारण का संदेश मिला। जब पतरू राम विश्वकर्मा ने आईजीआरएस पोर्टल पर रिपोर्ट डाउनलोड की तो वह हैरान रह गए। शिक्षक नियुक्ति की जांच से संबंधित शिकायत पर किसी मुस्लिम समुदाय के जमीन विवाद की जांच रिपोर्ट अपलोड कर दी गई थी।
आईजीआरएस पर हुए इस कथित फर्जीवाड़े के बाद सोमवार को शिकायतकर्ता ने डीएम कार्यालय में अपना रिकॉर्ड चेक कराया। वहां मौजूद कंप्यूटर ऑपरेटर के निर्देश पर जब शिकायती डाक रजिस्टर की जांच की गई तो पाया गया कि उनका मूल प्रार्थना पत्र वहां दर्ज ही नहीं किया गया था।
डीएम रविंद्र कुमार ने शिकायतकर्ता पतरू राम विश्वकर्मा को उक्त मामले में जांच कर कार्रवाई का आश्वासन दिया है।