फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

संविधान के लागू होने के बाद भी जारी है अत्याचार%

विज्ञापन
विज्ञापन
अखिल भारतीय अनुसूचित जाति, जनजाति कर्मचारी कल्याण एसोसिएशन द्वारा डा. अंबेडकर मिशन बढ़ाओ, आरक्षण बचाओ राष्ट्रीय महारैली का आयोजन रविवार को आईटीआई के मैदान में किया गया। रैली को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि बुद्धमित्र मुसाफिर ने कहा कि देश को आजाद हुए 70 साल हो गया और भारतीय संविधान को लागू हुए 68 साल हो गया, लेकिन आज भी पूरे देश में पिछड़े वर्ग के साथ लगातार अमानवीय अत्याचार जारी है।
विज्ञापन

उन्होंने कहा कि भारत में समता, स्वतंत्रता, न्याय और बंधुत्व पर आधारित समाज का निर्माण करना ही डा. अंबेडकर मिशन का मूल उद्देश्य और यह भारतीय संविधान में निहित है। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे राष्ट्रीय अध्यक्ष बाबा पी भोषले ने कहा कि डा.भीमराव अंबेडकर ने 1930, 31, 32 में हुए गोल मेज कांफ्रेंस में यह सिद्ध किया कि मुसलमानों, सिक्खों और इसाइयों को पृथक प्रतिनिधित्व दिया गया है क्योंकि वे हिंदुओं से अलग अस्तित्व रखते है। उनके द्वारा दिए गए साक्ष्यों को सही मानते हुए ब्रिटिश सरकार ने 17 अगस्त 1932 को अस्पृश्यों के लिए अलग प्रतिनिधित्व, कमुनल अवार्ड की घोषणा की। एसोसिएशन के प्रांतीय अध्यक्ष अरुण कुमार प्रेमी ने कहा कि डा. अंबेडकर ने अपने वाल्यूम-10 में लिखा है कि भारत का पिछड़ा वर्ग मूलत: नागवंशी बौद्ध हैं। राष्ट्रीय उप महासचिव नीलम निगम ने कहा कि 26 नवंबर 1956 को वाराणसी के काशी हिंदू विश्वविद्यालय में डा. अंबेडकर ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा था कि आप इस बात पर गंभीरता से विचार करें कि हिंदू शास्त्रों में वर्णित जीवन क्या हमारे संविधान के साथ साम्य रखते है। रैली को मंडल महासचिव सत्य प्रकाश बौद्ध ने भी संबोधित किया। रैली का संचालन जिलाध्यक्ष डा. प्रमोद कुमार गौतम ने किया। अंत में जिला महासचिव डा. राकेश बौद्ध ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें