लालगंज तहसील क्षेत्र के रेतवा चंद्रभानपुर गांव में होलिका और उसके आसपास की जिस जमीन को लेकर बीते कई दिनों से विवाद है। उसकी मूल जड़ जमीन पर बन रहा दस अरब का मुआवजा है। सरकारी कर्मचारियों की मिली भगत से तैयार हुई मुआवजे की इतनी बड़ी रकम को हर कोई हासिल करने का हर संभव प्रयास कर रहा है। जमीन की सही जानकारी के लिए गुरुवार को भी सीआरओ के नेतृत्व में राजस्व कर्मचारी पूरे दिन नाप जोख करते रहे। लेकिन कोई निष्कर्ष नहीं निकला। जमीन की सही जानकारी के लिए सीआरओ ने गांव का रिकार्ड तलब किया है।
आजमगढ़-वाराणसी मुख्य मार्ग पर स्थित रेतवा चंद्रभानपुर गांव में यह जमीन छावनी से सटी हुई है। इसी जमीन से होकर नेशनल हाइवे नंबर 233 निकला है। हाइवे निर्माण में जिन-जिन काश्तकारों की जमीन गई है। उन्हें सरकार से मुआवजे के रुप में अच्छी खासी रकम मिल रही है। कई लोग जमीन के बदले में मिले मुआवजे की रकम से करोड़पति हो गए हैं। ऐसे में रेतवा चंद्रभानपुर गांव में स्थित होलिका की जमीन से सटे उक्त जमीन का मुआवजा भूमि अध्याप्ति विभाग के अधिकारी और कर्मचारियों की मिली भगत से 87 हेक्टेयर जमीन का मुआवजा दस अरब रुपये बन गया है। उक्त मुआवजे के संबंध में सरकार की तरफ से गजट भी कर दिया गया है। उक्त जमीन को एक पक्ष अपना बताता है तो दूसरा पक्ष अपना बताता है। दोनों लोग अपने-अपने साक्ष्य सबूत भी पेश कर रहे हैं। उधर गांव वालों का आरोप है कि इसी जमीन से सटे पोखरे की जमीन पर भी कुछ लोग अवैध तरीके से कब्जा कर लिए हैं। इन्हें भी सरकारी जमीन से बेदखल किया जाना आवश्यक है। गुरुवार की सुबह से ही जमीन का विवाद हल करने के लिए सीआरओ आलोक वर्मा और एसपी सिटी सुभाष चंद्र गंगवार के नेतृत्व में एसडीएम लालगंज अभय कुमार मिश्रा, एसडीएम फूलपुर अनिल कुमार सिंह के नेतृत्व में काफी संख्या में राजस्वकर्मी पैमाइश के लिए लगे रहे।
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गलती से 087 एयर की जगह पर 87 हेक्टेयर जमीन का दस अरब मुआवजा बन गया है। मुआवजे की इसी रकम के लिए दोनों पक्षों में विवाद चल रहा है। जमीन के सही जानकारी के लिए गांव का रिकार्ड तलब किया गया है। वैसे प्रथम दृष्ट्या उक्त जमीन बंजर की प्रतीत हो रही है। फिलहाल अभिलेखों की जांच करने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।
आलोक वर्मा, मुख्य राजस्व अधिकारी