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त्रिपुरारी का पुरवा के 19 घरों पर मड़रा रहा कटान का खतरा

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लाटघाट(आजमगढ़)। देवारा क्षेत्र में घाघरा नदी का जलस्तर घटने तो लगा है लेकिन जलस्तर घटने के साथ ही कटान भी तेज हो गई है। कटाने में आई तेजी से ग्रामीणों में दहशत व्याप्त है। देवारा खास राजा गांव के त्रिपुरारी का पुरवा के 19 घरों पर कटान का खतरा मड़रा रहा है।
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नदी का जलस्तर कम तो हो रहा है लेकिन देवारा क्षेत्र के ग्रामीणों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। जलस्तर घटने के बाद गड्ढों में रूके पानी में हो रही सड़न से जहां संक्रामक रोगों के फैलने का खतरा मंड़रा रहा है वहीं तेजी से हो रही कटान ग्रामीणों की नींद उड़ाए हुए है। विगत 15 दिनों में नदी 100 बीघा से अधिक जमीन अंदर ही अंदर काट चुकी है। वहीं विस्थापितों की समस्या जस की तस बनी हुई है। अचल नगर के बाढ़ पीड़ितों को अभी तक कोई सरकारी सहायता नहीं मिली है। जबकि बाढ़ के कारण अचल नगर के 436 और अजगरा के 600 घर प्रभावित हैं। अजगरा गांव के निवासी विगत चार दिन से राशन के लिए पानी में चल कर या नाव से पांच किमी दूर बंधे पर जाकर वापस हो जा रहे हैं। बता दें कि इनको मुख्यमंत्री के आगमन पर भी बुलाया गया था लेकिन बाढ़ आपदा राहत से वंचित रहे। आज बेलहिया ढाले पर करीब 2:00 बजे के लगभग सैकड़ों की संख्या में महिला, पुरुष, बच्चे, बूढ़े हाथ में बोरी लेकर सुबह 10 बजे से इंतजार कर रहे थे। राशन न मिलने से आक्रोशित लोगों ने प्रदर्शन करना शुरू किया। फिर प्रधान महेश यादव ने तहसीलदार सगड़ी पी के राय से बात की और राशन वितरण कराने के आश्वासन पर शांत कराया। वहीं अजगरा गांव में 600 घर हैं। इन्हें राहत के नाम पर एक कौड़ी भी नहीं मिली। गांव के मुंशी यादव, राजेंद्र, उदयभान, बृजमोहन, रामशरण, राम प्रसाद, राम भजन, ओम प्रकाश, सुरेश, राम रूप, सतीश, जगधर आदि ने कहा कि हम बाढ़ पीड़ितों को अनावश्यक परेशान किया जा रहा है। बाढ़ राहत के नाम पर हम सब का शोषण किया जा रहा है। लोगों का आरोप है कि आपदा राहत वितरण में सेक्रेटरी, लेखपाल और प्रधान मिलकर पात्र व्यक्तियों की अनदेखी कर रहे हैं। सूची से पात्र व्यक्तियों के नाम गायब हैं।
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