अहरौला। ग्रामीण क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतरी के लिए स्थापित छह उपकेंद्रों को 2011 में फर्जी आदेश पर तोड़ डाला गया। इतना ही नहीं तोड़े गए उपकेंद्रों के मलबों का भी पता नहीं चला। 17 साल बीत जाने के बाद भी स्वास्थ्य महकमे ने जांच की कवायद ठंडे बस्ते में डाल रखी है।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अहरौला के अंतर्गत 1990 में दर्जन भर उपकेंद्रों की स्थापना करा कर एक एएनएम के साथ ही स्टाफ नर्स की भी तैनाती की गई थी। मार्च 2011 में तत्कालीन मुख्य चिकित्साधिकारी का आदेश आया कि जर्जर उपकेंद्रों को तोड़ दिया जाए। इस आदेश पर स्वास्थ्य उपकेंद्र माहुल, गनवारा, खजुरी, शाहपुर, चांदनी चौक, बस्ती भुजवल, शंभूपुर, भेदौरा को तोड़ दिया गया। साथ ही उपकेंद्रों का मलबा, दरवाजा, खिड़की आदि भी गायब हो गए। अन्य उपकेंद्रों को तोड़े जाने की कवायद चल ही रही थी कि इसी बीच नवंबर 2011 में फर्जी आदेश की जानकारी होने पर तत्कालीन सीएमओ ने नया आदेश जारी कर इसपर तत्काल रोक लगा दी। इसके साथ ही फर्जी आदेश पर तोड़े गए उपकेंद्रों के मलबे की खोज भी शुरू हो गई। इसके साथ ही मामले की जांच भी बैठा दी गई। 17 साल बीतने के बाद भी न तो उपकेंद्रों के मलबे का पता चला और न ही आदेश जारी करने वालों का।
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फजी आदेश पर उपकेंद्रों को तोड़े जाने और उसकी जांच के बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं है। फिर भी यदि ऐसा है तो इसकी जानकारी कर फर्जीवाड़े की जांच कराई जाएगी और जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. एके तिवारी, मुख्य चिकित्साधिकारी, आजमगढ़।