अहरौला। दुर्वासा धाम पर लगने वाला मेला 22 नवंबर से शुरू हो रहा है। तीन दिवसीय मेले को लेकर तीन किमी के क्षेत्र में स्थानीय व बाहरी दुकानदार दुकानें लगाने लगे हैं। मेला शुरू होने में मात्र दो दिन का समय है और अब तक मेला क्षेत्र का अधिकारियों ने हाल नहीं लिया है, जिसके चलते हर तरफ दुर्व्यवस्थाओं का अंबार लगा हुआ है। दुर्वासा धाम पर कार्तिक पूर्णिमा पर तीन दिवसीय मेले का आयोजन होता है। 23 नवंबर को कार्तिक पूर्णिमा का पर्व है। इससे एक दिन पूर्व 22 नवंबर से दुर्वासा मेले की शुरूआत होगी और एक दिन बाद 24 नवंबर तक यह मेला चलेगा। कार्तिक पूर्णिमा पर हजारों की संख्या में श्रद्घालु तमसा-मंजूषा के पवित्र संगम में गोते लगाएंगे। लगभग तीन किमी क्षेत्र में लगने वाला यह मेला प्राचीन काल से ही काफी प्रसिद्घ है। स्थानीय लोगों के साथ ही दूरदराज व गैर जनपदों से भी लोग इस मेले में शामिल होने के लिए आते है। मेले में मनोरंजन के विभिन्न साधन झूले, सर्कस, मौत का कूंआ आदि के साथ ही खिलौने, खान-पान की दुकाने सजने लगी है। मेला शुरू होने में मात्र दो दिन का समय बचा है लेकिन अब तक प्रशासनिक अमले ने मेला क्षेत्र का हाल नहीं लिया है। जगह-जगह गंदगी का अंबार लगा है, तो वहीं दशहरा-दीपावली पर प्रतिमा विसर्जन के लिए खोदे गए गड्ढे में पानी भरा होने और उसमें प्रतिमाओं के ढांचे सड़ने से दुर्गंध उठ रहा है। जिससे संक्रामक रोग फैलने का भी खतरा है। प्रशासन द्वारा अब तक व्यवस्था पर ध्यान न दिए जाने से स्थानीय लोगों के साथ ही मेला क्षेत्र में दुकान व मनोरंजन का साधन लेकर आए लोगों में रोष व्याप्त है।
पूर्व में मेला क्षेत्र का प्रशासनिक अमले द्वारा एक सप्ताह पूर्व ही निरीक्षण कर तैयारियों को अंतिम रूप दिया जाता था, लेकिन इस बार अब तक प्रशासन का कोई भी अधिकारी मेला क्षेत्र का मुआयना करने नहीं आया है। जिला प्रशासन दुर्वासा धाम पर लगने वाले मेले को गंभीरता से नहीं ले रहा है।
श्री राम गिरी, मुख्य पुजारी, दुर्वासा धाम मंदिर
दुकानों को अंतिम रूप देने में जुटे है दुकानदार
अहरौला। दुर्वासा धाम पर लगने वाले तीन दिवसीय मेले की तैयारी जोरों पर चल रही है। मेला समिति के देखरेेख में बाहर से आए दुकानदार व मनोरंजन के साधन वाले अपनी-अपनी दुकानें सजाने में जुटे हुए है। खजला की दुकान, थियेटर, झूला व मौत का कुआं लगभग तैयार हो चुके है। छोटे दुकानदारों द्वारा भी अपना स्थान चिन्हित कर व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है। खजला की दुकान लेकर इस बार के मेले में लखमपुर, कानपुर, बुलंदशहर, झांसी आदि से दुकानदार आए हुए है।