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नहीं पहुंचे निलंबन के आदेश, चर्चाओं का बाजार गर्म

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आजमगढ़। शासन के निर्देशों की अवहेलना और हाईकोर्ट के आदेश की अवमानना में निलंबित समाज कल्याण अधिकारी के निलंबन के आदेेश पर शनिवार को भी जनपद में नहीं पहुंचे। प्रशासनिक अधिकारियों के आदेश मिलने से इंकार करने पर जनपद में चर्चाओं का बाजार गरम है। शासन के निर्देशों को समय पर पूरा न कर पाने के मामले में समाज कल्याण विभाग के एक कर्मचारी की भूमिका भी संदिग्ध मानी जा रही है।
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लंगड़पुर स्थिति महादेवी बाल विद्यालय के साथ शिक्षकों दूधनाथ राम, रामकेर राम, बरखू राम, चंद्रभूषण, अशोक कुमार, महेंद्र राय, राजनाथ यादव का वेतन वर्ष 2005 में इनकी नियुक्ति को अनियमित बताते हुए स्थानीय अधिकारियों की रिपोर्ट पर डायरेक्टर समाज कल्याण ने रोक दिया था। इसकी को लेकर ये शिक्षक हाईकोर्ट चले गए थे। इसमें तीन शिक्षकों चंद्रभूषण, राममकेर और बरखू यादव की मौत हो चुकी है। अशोक भी सेवानिवृत्त हो गए हैं। 12 सितंबर को हाईकोर्ट ने इन शिक्षकों का रुका वेतन जारी करने के निर्देश हाईकोर्ट ने दिए थे। शिक्षकों की माने तो इनकी करीब दो करोड़ रुपया वेतन बकाया है। आदेश मिलने के बाद डायरेक्टर समाज कल्याण की ओर से समाज कल्याण अधिकारी को वेतन जारी के आदेश दिए गए, लेकिन वेतन जारी नहीं हो पाया। आदेश के बाद भी वेतन जारी नहीं होने पर शिक्षकों की ओर से अवमानना याचिका हाईकोर्ट में दाखिल कर दी गई। हाईकोर्ट ने 12 जनवरी को इसमें डायरेक्टर समाज कल्याण मनोज सिंह को आदेश का पालन न होने में दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों का उत्तरदायित्व निर्धारित करते हुए एक सप्ताह के भीतर अगत कराने का निर्देश दे दिया गया। प्रमुख सचिव मनोजतसिंह ने मामले में 20 जनवरी को दोषी पाए जाने पर समाज कल्याण अधिकारी राजीव रत्न सिंह को निलंबित करते हुए निदेशक कार्यालय से अटैच करने के निर्देश दे दिए। साथ ही मामले की जांच के आदेश उप निदेश पीके त्रिपाठी को सौंप दी।
जनपद में 24 जनवरी को समाज कल्याण अधिकारी के निलंबन की जानकारी होने पर हड़कंप मच गया था। हालांकि उनका निलंबन संबंधी आदेश मिलने से अभी भी इंकार किया जा रहा है। प्रभारी डीएम एवं एडीएम (वित्त एवं राजस्व) ने ब ताया कि इस आशय का कोई आदेश अभी प्राप्त नहीं हुआ है। वहीं, लंगड़पुर के सात शिक्षकों को वेतन अभी तक न जारी हो पाने के मामले में एक विभागीय लिपिक की संलिप्तता खुलकर सामने आ रही है। विभागीय सूत्रों की मानें समाज कल्याण अधिकारी पर तो कार्रवाई हो चुकी है, देर-सवेर इन पर भी कार्रवाई की गाज गिरनी तय है।
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