जिले की 148 और साधन सहकारी समितियों को डिजिटल बनाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इससे किसानों को समितियों पर खाद सहित अन्य सुविधाएं ऑनलाइन मिल सकेंगी। साथ ही आसपास के ग्रामीणों को जन सुविधा केंद्र (सीएससी) की सेवाओं का लाभ भी मिलेगा। इससे पहले दो चरणों में 60 साधन सहकारी समितियों के डिजिटलीकरण का काम पूरा हो चुका है। इन समितियों में ऑनलाइन कारोबार भी शुरू करा दिया गया है।
जिले में कुल 250 सहकारी समितियां हैं। समितियों को आर्थिक रूप से सुदृढ़ बनाने और उनकी कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लाने के लिए यह पहल की जा रही है। डिजिटलीकरण के तहत समितियों में कंप्यूटर, फर्नीचर सहित अन्य जरूरी व्यवस्थाएं की जा रही हैं।
एआर सहकारिता अजय कुमार ने बताया कि प्रत्येक समिति पर चार से पांच लाख रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इससे समितियों का लेखा-जोखा ऑनलाइन रखने में सहूलियत होगी। साथ ही वाउचर फीडिंग, बैलेंस शीट तैयार करने और उर्वरकों के लेनदेन की प्रक्रिया भी ऑनलाइन की जा रही है। उन्होंने बताया कि केंद्र में
सहकारिता मंत्रालय के गठन के बाद से समितियों को आधुनिक सुविधाओं से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य समितियों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के साथ किसानों और ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर अधिक से अधिक सुविधाएं उपलब्ध कराना है। ऑनलाइन व्यवस्था लागू होने से समितियों के कामकाज में पारदर्शिता बढ़ेगी और रिकॉर्ड के रखरखाव में भी आसानी होगी।
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पहले और दूसरे चरण में 60 समितियों का डिजिटलीकरण पूरा कर वहां ऑनलाइन कारोबार शुरू करा दिया गया है। अब शासन से तीसरे चरण में 148 और समितियों के डिजिटलीकरण की मंजूरी मिली है। इन पर काम शुरू करा दिया गया है। -अजय कुमार, सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक सहकारिता।