रानी की सराय (आजमगढ़)। गर्मी के मौसम अपने चरम पर पहुंच चुका है। तपते मौसम में गला तर करने के लिए चट्टी-चौराहों और बाजारों में सजे फलो के जूस की दुकानों पर लोगों की भीड़ जुट रही है। जूस के इन दुकानों पर धड़ल्ले से मीठा हजार बेचा जा रहा है। फलो के स्थान पर केमिकल का प्रयोग हो रहा है। फिर भी शासन-प्रशासन मौन साधे हुए है।
शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्र में इन दिनों ठेले पर आम, पपीता, बेल के जूस की दुकान सजी हुई है। आम की कीमत भले ही सौ से सवा सौ रुपये किलो है फिर भी आम जा जूस इन दुकानों पर मात्र 10 रुपये गिलास ही उपलब्ध है। असली फलों के नाम पर ठेले पर सजी इन दुकानों से केमिकल युक्त रसों से बने जूस को बर्फ और चीनी आदि डाल कर बेचा जा रहा है। गर्मी के मौसम के चलते मजबूरी में लोग इसे पी भी रहे है। फलो के जूस की इन दुकानों पर उपलब्ध जूस में फल का स्वाद जरूर मिलता है लेकिन वास्तव में यह फल के होते नहीं है। सबसे बड़ी बात तो यह है कि इन दुकानों पर जितनी जूस की खपत है, उतनी मात्रा में फल अभी बाजार में उपलब्ध भी नहीं है।