आजमगढ़। जिले में वर्ष 2007 से 2013 के दौरान समाज कल्याण विभाग में हुए 150 करोड़ से अधिक के घोटाले की जांच भले ही ईओडब्ल्यू को सौंप दी गई हो, लेकिन जिला प्रशासन ने चिह्नित आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई बंद नहीं की गई है।
जांच के दौरान अपनी ओर से चिह्नित 11 आरोपियों के खिलाफ गैंगेस्टर की कार्रवाई करने की प्रक्रिया छेड़ दी गई है। देर रात तक इस मामले में पुलिस-प्रशासनिक कार्रवाई जारी रही।
जनपद में वर्ष 2007 से 13 के दौरान समाजकल्याण, प्रोबेशन और पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग में छात्रवृत्ति, शुल्क प्रतिपूर्ति, पेंशन और अन्य कल्याणकारी योजनाओं में 150 करोड़ से अधिक का घोटाला हुआ था।
2.86 करोड़ के घोटाले के साक्ष्य मिले थे। दो थानों में चार एफआईआर दर्ज हुई थी और 34 आरोपी नामजद हुए थे। घोटाले में अभी तक तीन लोगों को गिरफ्तार जेल भेजा जा चुका है।
विभागीय बाबुओं की ओर से बैंक अधिकारियों की मिलीभगत से फर्जी खाते खुलवा कर छात्रवृत्ति, शुल्क प्रतिपूर्ति, पेंशन और अन्य कल्याणकारी योजनाओं के रिटर्निंग चेकों को भुनाया गया था। कुछ बाबुओं को निलंबित भी किया गया था, लेकिन बाद में ये विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से फिर से बहाल हो गए और दूसरे जिलों में तैनात भी हो गए।
इस तरह से इनकी ऊपर नकेल नहीं कसी जा सकी थी। मामला ठंडे बस्ते में चला गया था। अमर उजाला की ओर से फिर से समाज कल्याण विभाग में हुए घोटाले की मुद्दा उठाने के बाद जिलाधिकारी चंद्रभूषण सिंह ने सख्ती बरती थी और डीसीबी की मुख्य शाखा के प्रबंधक समेत सात लोगों के खिलाफ पिछले दिनों 2.86 लाख रुपये की रिकवरी के लिए नोटिस जारी किया था।
इसके बाद लगभग 50 करोड़ के छात्रवृत्ति घोटाले में 50 स्कूल कालेजों को भी छात्रों के सत्यापन के लिए नोटिस जारी किया गया था। मामले की जांच कर रही क्राइम ब्रांच ने भी प्रेबोशन विभाग के बाबू सुभाष चंद्र और डीसीबी कप्तानगंज के तत्कालीन प्रबंधक हरीराम यादव को गिरफ्तार किया था, जो जेल में हैं।
घोटाले की जांच शासन की ओर से आर्थिक अपराध अनुसंधान (ईओडब्ल्यू) को भले ही सौंप दिया गया है। लेकिन जिला प्रशासन की ओर से मामले में कार्रवाई जारी है। मामले के 11 आरोपियों के खिलाफ गैंगेस्टर लगाने की पूरी तैयारी कर ली गई है।
सूत्रों के अनुसार इसमें अधिकतर कई विभागों के बाबू हैं, जो अभी तक कार्रवाई की जद में आने से बचे हुए थे। बुधवार को देर रात पुलिस-प्रशासन की ओर से आरोपियों के खिलाफ गैंगेस्टर लगाने की कार्रवाई की जा रही थी।
समाज कल्याण विभाग में हुए घोटाले की जांच शासन की ओर से ईओडब्ल्यू को सौंपी गई है, लेकिन जिला प्रशासन की ओर से चिह्नित आरोपियों को बख्शा नहीं जाएगी। आरोपियों के ख्िलाफ गैंगेस्टर की कार्रटवाई होगी, इस तरह का घोटाला करने वालों को सबक मिल सके। --चंद्रभूषण सिंह, जिलाधिकारी