बलरामपुर। बारिश के बाद मौसम में आ रहे बदलावों का असर अब लोगों की त्वचा पर भी नजर आने लगा है। अस्पतालों में त्वचा संबंधी बीमारियों से ग्रसित मरीजों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। लगातार उमस और तापमान में उतार-चढ़ाव के कारण फंगल इंफेक्शन, एलर्जी, फुंसी और सड़न जैसी समस्याएं आम हो गई हैं।
जिला मंडलीय चिकित्सालय की चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. पूनम कुमारी ने बताया कि पहले जहां ओपीडी में प्रतिदिन 150 से 160 मरीज आते थे, अब यह संख्या बढ़कर 200 से 210 तक पहुंच गई है। इनमें करीब 100 नए मरीज हर दिन सामने आ रहे हैं। इन मरीजों में प्रमुख रूप से इनसेक्ट बाइट (कीड़े काटने), फंगस, एलर्जी, हाथ-पैर में फंगल इंफेक्शन और त्वचा की सड़न की शिकायतें देखी जा रही हैं। डॉ. पूनम ने बताया कि बारिश के बाद तेज धूप और उमस ने फंगल संक्रमण की आशंका को बढ़ा दिया है। ऐसे में लोगों को त्वचा की स्वच्छता बनाए रखने, गीले कपड़ों से बचने, और संक्रमित क्षेत्रों को सूखा रखने की सलाह दी जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि समय पर दवा लेने और डॉक्टर की सलाह से ही इन बीमारियों से बचा जा सकता है।
उमस भरी गर्मी से बढ़े उल्टी, दस्त व बुखार के मरीज
बलरामपुर। बारिश के बाद निकली तेज धूप और उमस लोगों की सेहत पर भारी पड़ रही है। मंडलीय जिला चिकित्सालय आजमगढ़ में उल्टी, दस्त, पेट दर्द और सर्दी-जुकाम के मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। बृहस्पतिवार को अस्पताल की ओपीडी में 50 से 60 मरीज पहुंचे, इनमें बड़ी संख्या में बुखार, उल्टी-दस्त और पेट से जुड़ी बीमारियों से पीड़ित थे।
जिला मंडलीय चिकित्सालय के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. मुकेश शहानी की ओपीडी में ही 30 प्रतिशत मरीज सर्दी, जुकाम व बुखार से ग्रसित थे जबकि 6 से 7 मरीजों में उल्टी-दस्त की शिकायत देखी गई। इसके अलावा, दो से तीन मरीज थैलेसीमिया से भी पीड़ित मिले। डॉ. मुकेश शहानी ने लोगों को सावधान करते हुए कहा कि साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें। बच्चों को मिट्टी में खेलने से रोकें और बारिश के पानी में भीगने न दें। गीले कपड़ों की बजाय सूखे और साफ कपड़े पहनाना जरूरी है, ताकि त्वचा और वायरल संक्रमण से बचा जा सके।