सपा अल्पसंख्यक सभा के शनिवार को लखनऊ में आयोजित ‘अल्पसंख्यक जागरूकता’ सम्मेलन में आजम खां नहीं आए। इसको लेकर भले ही मंच पर बैठे नेता पिछले तीन दिन से यह तर्क दे रहे हों कि उन्होंने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव, प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश यादव तथा आम लोगों को छोड़ किसी को नहीं बुलाया।
पार्टी का कार्यक्रम है, इसलिए इसमें किसी को बुलाने की क्या आवश्यकता। लोगों को खुद आना चाहिए। पर, कार्यक्रम में जुटी भीड़ में लगातार आजम की गैरमौजूदगी पर सवाल उठ रहे थे। लोगों को ताज्जुब हो रहा था कि पार्टी का मुस्लिम चेहरा माने जाने वाले आजम आखिर मुसलमानों की इतनी बड़ी जुटान में क्यों नहीं आए।
हालांकि पार्टी के भीतर ‘आजम बनाम अन्य मुस्लिम नेता’ की स्थिति को जानने व समझने वालों को पहले से आजम के इस सम्मेलन में न शामिल होने की आशंका थी। पर, इस कार्यक्रम के लिए शहर में लगी होर्डिंगों पर जब आजम का फोटो नहीं दिखा तो लगभग यह पक्का हो गया कि वह नहीं आएंगे।
कार्यक्रम के आयोजक हाजी रियाज केमुंह से जब यह जुमले निकले कि कुछ लोग खुद को मुसलमानों का मसीहा कहते हैं लेकिन मिलने से भी परहेज करते हैं। तो यह समझने में देर नहीं लगी कि इशारा किस ओर है।
कारण, सपा में काफी पहले से ही आजम और अन्य मुस्लिम नेताओं के बीच रिश्ते बहुत मधुर नहीं दिखते हैं। पर, सम्मेलन में आए सभी के पास शायद राजनीति के इस तिकड़म को समझने की शक्ति नहीं थी।
इसलिए कुछ लोग आपस में आजम की गैरमौजूदगी पर नाराजगी भी जता रहे थे यह कहते हुए, ‘कहेंगे खुद को मुसलमानों का रहनुमा। पर, किसी दूसरे मुसलमान नेता के साथ चलना या बैठना गवांरा नहीं करेंगे।’
सम्मेलन में शाहिद मंजूर सहित अन्य कई मुस्लिम मंत्री व नेता भी नहीं थे। पर आजम की गैरमौजूदगी की जितनी चर्चा थी। उतनी अन्य किसी की नहीं।