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कारगिल युद्ध पर भड़काऊ बयान देकर फंसे आजम, अखिलेश ने भी झाड़ा पल्ला

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यूपी के कैबिनेट मंत्री आजम खां के बयान पर बवाल मच गया है। आजम खां ने 7 अप्रैल को मसूरी मैदान में सपा प्रत्याशी सुधन रावत के समर्थन में आयोजित एक सभा में कई ऐसी भड़काऊ बातें कहीं कि चुनाव आयोग ने उन पर संज्ञान ले लिया। चुनाव आयोग ने जिला प्रशासन से इस सभा की रिकार्डिंग सीडी तलब की है। देर शाम प्रशासन ने सीडी चुनाव आयोग को भेज दी। डीएम एसवीएस रंगाराव ने इसकी पुष्टि की है।
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कैबिनेट मंत्री आजम खां ने 1999 में हुए कारगिल युद्ध को मुस्लिम सैनिकों द्वारा जीते जाने की बात कही थी। मोदी को मुस्लिमों का दुश्मन और अमित शाह को गुंडा नंबर-1 की संज्ञा भी आजम ने मंच से दी थी। मामला मीडिया में आया तो तूल पकड़ गया।

चुनाव आयोग ने खुद ही इस पर संज्ञान लेते हुए जिला प्रशासन से उक्त सभा की रिकार्डिंग की गई पूरी सीडी तलब की।

चुनाव आयोग को भेजी सीडी

आयोग की इस कार्रवाई के बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में सभा में रिकार्डिंग की गई सीडी को चुनाव आयोग को भेज दिया गया।

डीएम एसवीएस रंगाराव ने बताया कि पूरी सभा की रिकार्डिंग कराई गई थी। करीब 40 मिनट की सीडी को चुनाव आयोग को भेज दिया गया है। आयोग की सीडी का अवलोकन करने के बाद कोई फैसला लेगा।

दूसरी ओर देर शाम मामले में बवाल मचता देख यूपी के सीएम अखिलेश यादव ने भी खुद को आजम खां के बयान से अलग करते हुए कहा कि कारगिल युद्ध में शहीद सैनिकों को वह नमन करते हैं। कारगिल में कोई एक धर्म या जाति के सैनिकों ने भाग नहीं लिया था। कारगिल युद्ध सभी ने मिलकर जीता था।

आजम अपनी बयान पर कायम

प्रदेश के नगर विकास मंत्री आजम खां गाजियाबाद में कारगिल युद्ध को लेकर दिए गए बयान पर कायम हैं। उनका कहना है कि इस बयान को जो लोग बुरा मान रहे हैं, वो हिंदू-मुसलमानों के बीच खाई को बढ़ा रहे हैं। उनका बयान इस संदर्भ में था कि फासिस्ट ताकतें दुष्प्रचार कर रही हैं कि मुसलमानों को देश की आजादी और सुरक्षा में कोई योगदान नहीं है। यह मुसलमानों का दुर्भाग्य है कि उनको अपनी देशभक्ति को लेकर सफाई देनी पड़ती है।

बुधवार को जारी बयान में आजम खां ने कहा कि कारगिल की पहाड़ियों पर मुसलमान जवानों ने भी उतनी ही बहादुरी से जंग लड़ी थी जितनी किसी और ने। अगर हम इस जंग में अपने योगदान का जिक्र करते हैं, तो फासिस्ट ताकतों का बुरा लगता है। अगर हम कहते हैं हम मुल्क की सरहदों की हिफाजत करेंगे, तो हमें शहादत के दर्जे से महरूम किया जाता है।

गौरतलब है कि आजम खां ने मंगलवार को गाजियाबाद में कहा था कि 1999 के कारगिल युद्ध भारत को मुसलमान सैनिकों ने फतह दिलाई थी। आजम खां के इस बयान की कांग्रेस और भाजपा ने कड़ी आलोचना की है। इसको लेकर चुनाव आयोग से शिकायत भी की गई है। आजम खां ने जोर देकर कहा कि समृद्ध भारत का सपना उस वक्त साकार नहीं हो सकता है, जब तक कि हिंदू, मुसलमान, सिख, ईसाई में आपसी भाईचारा न हो।

अखिलेश ने आजम के बयान को गलत बताया

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपने कैबिनेट मंत्री आजम खान के कारगिल पर दिए गए बयान को गलत बताया है। यहां चुनावी जनसभा के बाद मीडिया से रूबरू मुख्यमंत्री ने दो टूक कहा कि कारगिल युद्ध में किसी वर्ग विशेष के सैनिकों का नहीं, सभी सैनिकों का संयुक्त योगदान था।

जनसभा के बाद मुख्यमंत्री से आजम खान के कारगिल में मुसलमान सैनिकों पर दिए बयान के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि बयान पूरी तरह से गलत है। कारगिल युद्ध में हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई सभी धर्म के सैनिकों ने अपने साहस का परिचय देकर मोर्चा संभाला था।
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भाजपा, कांग्रेस के निशाने पर आए आजम

सपा के वरिष्ठ नेता आजम खान कारगिल को सियासी पिच पर लाकर विरोधी दलों के निशाने पर आ गए हैं। भाजपा और कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश की सपा सरकार के वरिष्ठ मंत्री पर सांप्रदायिक राजनीति करने का आरोप लगाया है। भाजपा ने चुनाव आयोग का दरवाजा खटखटाकर आजम के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। साथ ही भाजपा ने सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव और रालोद प्रमुख अजित सिंह की भी शिकायत की है।

भाजपा और कांग्रेस के हमलावर रुख और शिकायत के बाद चुनाव आयोग ने आजम को नोटिस भेजा है। भाजपा नेता मुख्तार अब्बास नकवी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य चुनाव आयुक्त से मुलाकात कर इस मामले में शिकायत भी दर्ज कराई। नकवी ने कहा कि हार से डरी सपा अब खुलकर सांप्रदायिक राजनीति कर धर्मों के बीच वैमनस्य पैदा कर रही है।

उधर कांग्रेस ने भी आजम के बयान की भर्त्सना की। केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा ने कहा कि कारगिल युद्ध में भारत मां के जांबाज सैनिक लड़े थे न कि हिंदू और मुसलमान। उन्होंने आरोप लगाया कि इस बयान के जरिए आजम सांप्रदायिक राजनीति कर रहे हैं।
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