उत्तर प्रदेश विधानसभा में गुरुवार को विधायकों की वेतन वृद्घि के मसले पर संसदीय कार्य मंत्री आजम खां ने कहा कि जिसका जितना बड़ा परिवार हो उसका उतना ही बड़ा वेतन होना चाहिए।
विधायकों की वेतन वृद्घि का मुद्दा भाजपा विधायक सुरेश खन्ना ने उठाया था। सुरेश खन्ना कुंवारे हैं, इसकी चुटकी लेते हुए उन्होंने कहा, 'अब बताएं खन्ना जी (कुंवारे) को पूरा वेतन क्यों मिले? बाकी वेतन कहां खर्च करते हैं यह भी बताएं?'
दरअसल गुरुवार को विधानसभा में विधायकों ने पार्टी लाइन से हटकर वेतन बढ़ाने की मांग की। शून्य प्रहर में भाजपा विधायक सुरेश खन्ना ने मामला औचित्य के प्रश्न के जरिए उठाया।
उन्होंने कहा, 'प्रोटोकॉल में विधायक मुख्य सचिव से ऊपर हैं, फिर भी उनका वेतन कम है।' खन्ना ने मांग की कि विधायकों का वेतन अफसरों से अधिक कर दिया जाए। साथ ही उन्होंने कहा कि विधायकों की वेतन वृद्धि को मूल्य सूचकांक से जोड़ देना चाहिए।
सुरेश खन्ना की मांग का कई विधायकों ने समर्थन किया। सरकार ने भी विधायकों के सुर में सुर मिलाते हुए कहा कि भले ही आलोचना हो और विधायकों पर अपनी तनख्वाहें बढ़ाने की तोहमत लगे, लेकिन सरकार इस पर विचार कर रही है।
सदन में विधायकों की वेतनवृद्घि की मीडिया द्वारा होने वाली आलोचना का मुद्दा भी उठा। संसदीय कार्य मंत्री आजम खां ने मीडिया को आडे़ हाथों लेते हुए कहा कि मीडिया भी अपनी सैलरी देखे। जिनके तीन-चार बच्चे हैं, इस तनख्वाह में बच्चों को अच्छे कॉलेजों में पढ़ा पाना मुश्किल है।
अध्यक्ष की झिड़की
सदन में सुरेश खन्ना ने जब वेतन का मुद्दा उठाया तो अध्यक्ष माता प्रसाद पांडेय ने कहा कि विधायक होकर वेतन की बात करते हो। जनता को भी देखो।
इस पर जवाब देने खड़े हुए आजम ने अध्यक्ष से कहा कि आपका बस चले तो जब पहली बार चुनकर आए थे वही वेतन लागू करा दें। उन्होंने कहा कि वेतन बढ़ाने पर विचार हो रहा है। अध्यक्ष से अनुरोध है कि मीटिंग में मुखालफत न करें।
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश मे फिलहाल विधायकों को वेतन के रूप में 50 हजार रुपए मिलते हैं, जिनमें मुख्य वेतन के 8,000 रुपए, निर्वाचन क्षेत्र भत्ते के 22,000 रुपए, चिकित्सा भत्ते के 10,000 रुपए और सचिव भत्ते के 10,000 रुपए शामिल हैं।