- श्रद्धालुओं को धर्म, भक्ति और मर्यादा का संदेश दे रहे हैं राम कथा के प्रसंग
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संवाद न्यूज एजेंसी
अयोध्या। पुरुषोत्तम मास (मलमास) के पावन अवसर पर रामनगरी पूरी तरह भक्ति और आध्यात्मिक वातावरण में सराबोर है। विभिन्न मंदिरों और आश्रमों में चल रही रामकथाओं की रसधारा से श्रद्धालु भावविभोर हो रहे हैं। संत-महात्माओं के मुखारविंद से निकल रहे राम कथा के प्रसंग श्रद्धालुओं को धर्म, भक्ति और मर्यादा का संदेश दे रहे हैं।
मणिराम दास की छावनी में संचालित रामकथा महोत्सव में जगद्गुरु रामदिनेशाचार्य ने कथा के पांचवें दिन कहा कि पुरुषोत्तम मास आत्मशुद्धि, साधना और भगवान के स्मरण का श्रेष्ठ समय है। इस मास में भगवान श्रीराम के चरित्र का श्रवण करने से जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से अपने जीवन में मर्यादा, सेवा और भक्ति को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कथा के दौरान कहा कि जब श्रद्धा और विश्वास एक साथ जुड़ते हैं, तभी रामकथा की वास्तविक अनुभूति होती है।
वहीं रामकुंज में हो रही श्रीमद्भागवत के दूसरे दिन महंत डॉ. रामानंद दास ने कहा कि प्रभु से बढ़कर इस संसार में कोई सुख और सम्पदा नहीं है。 मनुष्य को अपना जीवन सांसारिक विषयों को भोगने के बजाय भगवत भक्ति में लगाना चाहिए। भक्ति एक ऐसा उत्तम निवेश है, जो जीवन में परेशानियों का उत्तम समाधान देती है। साथ ही जीवन के बाद मोक्ष भी सुनिश्चित करती है। सावर्थिया सदन में जगद्गुरु रत्नेश प्रपन्नाचार्य ने भी राम कथा की महिमा का बखान किया। कहा कि भगवान श्रीराम का चरित्र केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं, बल्कि संपूर्ण मानव समाज के लिए आदर्श जीवन पद्धति है।