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Ayodhya News: मंदिर आंदोलन की यादें ताजा करता है रामलला का निमंत्रण पत्र

Thu, 11 Jan 2024 09:16 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
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अमर उजाला विशेष
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15 पन्नोंं की इबारत में इतिहास से वर्तमान तक का सार
राजेंद्र कुमार पांडेय

अयोध्या। श्रीराम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा को लेकर दिए जा रहे निमंत्रण पत्र में रामलला के प्रति श्रद्धा के साथ मंदिर आंदोलन की यादों की झलक भी मिलती है। निमंत्रण पत्र के साथ दी जा रही संकल्प संप्रेषण पुस्तिका के 13 पन्नों की इबारत में इतिहास के साथ वर्तमान का सार दर्ज है। भूमिका में कहा गया है कि यह पुष्प उन सभी हुतात्माओं को समर्पित है, जिन्होंने वर्ष 1528 से 1984 ई. तक श्री रामजन्मभूमि को मुक्त कराने के लिए प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष संघर्षों में भाग लिया।

देश के सात हजार विशिष्ट जनों को निमंत्रण पत्र संघ के संपर्क विभाग के प्रचारकों और स्वयं सेवकों की ओर से उनके आवास पर पहुंचकर दिया जा रहा है। रीमाधव आर्ट से डिजाइन और प्रिंट किए गए निमंत्रण पत्र के रंगों का चयन भी जैसे कालखंडों के हिसाब से किया गया है। लिफाफे का रंग अतीत के पन्नों के रंग से मिलता जुलता है। अंदर दो बड़े और दो छोटे पन्नों का रंग अलग है। इसे हल्का गाढ़ा कत्थई कह सकते हैं। लिफाफे के अंदर 13 पन्नों की संकल्प संप्रेषण नाम की इसी रंग की पुस्तिका भी विशिष्ट जनों को दी जा रही है।
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निमंत्रण पत्र अपूर्व... अनादिक निमंत्रण.... श्रीराम धाम और सादर जैसे शब्दों से शुरू होता है। अंदर श्री राम मंदिर के विहंगम दृश्य, इसके नीचे मर्यादापुरी अयोध्या का संबोधन है। इससे देखकर मन आह्लादित होता है। अंदर, अतिथि संबोधन के साथ ही लिखा गया है कि लगभग 495 वर्षों के बाद आ रहे इस पावन अवसर का साक्षी होने का सद्भाग्य आपको प्राप्त हो रहा है। इस अति विशिष्ट अवसर पर 22 जनवरी को आप सादर आमंत्रित हैं। इस पुस्तिका का अगला पृष्ठ रामलला के चित्र से शुरू होता है। अंदर की इबारतें राम मंदिर की मुक्ति के संघर्ष की याद ताजा कराती हैं।
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22 विशिष्ट व्यक्तियों के योगदान को रेखांकित
जिनके आशीर्वाद से मंदिर आंदोलन परवान चढ़ा, उन संतों और जिनकी महती भूमिका रही, ऐसे 22 विशिष्ट व्यक्तियों को उनके चित्र के साथ योगदान को रेखांकित किया गया है। शुरुआत देवरहा बाबा से होती है। वर्ष 1989 के प्रयागकुंभ में आयोजित धर्म संसद में उन्होंने कहा था कि मंदिर आंदोलन उनकी सहमति से चल रहा है। इसके बाद आंदोलन को आगे बढ़ाने वाले महंत परमहंस रामचंद्र दास, महंत अभिराम दास, 1950 में सिटी मजिस्ट्रेट रहे ठाकुर गुरुदत्त सिंह, वर्ष 1949-50 में डीएम रहे केके नायर, दाऊ दयाल खन्ना, गोपाल सिंह विशारद, ओंकार भावे, महंत अवैद्यनाथ, स्वामी शिवरामाचार्य जी महराज, देवकीनंदन अग्रवाल, जगदगुरु मध्वाचार्य विश्वेश तीर्थ जी महराज, स्वामी शांतानंद सरस्वतीजी महराज, वीतराग पूज्य श्री स्वामी वामदेव जी महराज, विष्णु हरि डालमिया, मधुकर दत्तात्रेय देवरस, श्री स्वामी सत्य मित्रानंद गिरि जी महराज, राजेंद्र सिंह रज्जू भैया, मोरोपंत पिंगले, आचार्य गिरि राज किशोर, राजमाता विजयाराजे सिंधिया और अशोक सिंह शामिल हैं।
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