अयोध्या। अप्रतिम कथा प्रवक्ता मोरारी बापू अयोध्या में सरयू के समानांतर रामकथा की रसधार प्रवाहित कर रहे हैं। रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की खुशी में तीर्थ क्षेत्र पुरम में संचालित मानस राममंदिर कथा में मोरारी बापू ने भक्तों को रामनाम की महिमा बताई। कहा कि सब झंझट छोड़कर राम को भजो...जीवन की दिशा बदल जाएगी।
हनुमान चालीसा की चौपाई की धुन में शुुरु हुई रामकथा में उन्होंने कहा कि उन्होंने कहा कि रामचरित मानस में सभी रस हैं। रामनाम परम मंत्र है, महामंत्र है, मंत्रराज है। इसमें जो रकार है वह ईश्वर परक है, जो मकार है वह जीव परक है। जो बीच का अकार है वह सेतुपरक है। जो जीव और ईश्वर के मिलन का सेतु बनता है। उन्होंने राममंदिर को सात बिंदुओं से जोड़कर श्रोताओं को इसकी महत्ता बताई। स्वाभाविक व्रत, दीक्षा, दक्षिणा, श्रद्धा, सत्य, प्रेम व करुणा...को व्याख्यायित करते हुए कहा कि राम सत्य हैं, प्रेम मूर्ति हैं, करुणानिधि हैं, राम सब कुछ हैं।
आगे कहा कि ज्ञान की प्राप्ति से श्रद्धा और श्रद्धा से सत्य प्रकट होता है। वेदांत व गुरुदेव के बोले वाक्य में दृढ़ विश्वास ही श्रद्धा है। मंदिरों में श्रद्धा प्रकट होनी चाहिए। सत्य से प्रेम प्रकट होता है। हमारे अंदर जब पूर्णरूप से सत्य प्रकट हो जाता है तो हम सभी को प्रेम करने लगते हैं। सत्यसेवी किसी का तिरस्कार नहीं करता।
कहा कि प्रेम से करुणा प्रकट होती है। करुणावान मनुष्य राम जी को बहुत प्रिय है। राम से जुड़ जाओगे तो सब कुछ पाओगे, इसलिए राम से जुड़े रहने के लिए कथा से जुड़े रहना जरूरी है। इस अवसर पर श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, विहिप के अध्यक्ष आलोक कुमार सहित बड़ी संख्या में भक्त मौजूद रहे।