अयोध्या। राम मंदिर निर्माण के लिए पहली ईंट (रामशिला) रखने वाले प्रथम कारसेवक कामेश्वर चौपाल का निधन हो गया। वे लंबे समय से किडनी रोग से पीड़ित थे। दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में बृहस्पतिवार रात उन्होंने अंतिम सांस ली। राम मंदिर आंदोलन में उनका अहम योगदान था। राम मंदिर ट्रस्ट, संघ व विहिप के उनके निधन पर शोक व्यक्त किया है।
कामेश्वर चौपाल को नौ नवंबर 1989 को श्रीराम जन्मभूमि मंदिर की नींव की पहली ईंट रखने का सौभाग्य प्राप्त हुआ था। नौ नवंबर 2019 को जब सुप्रीम कोर्ट से राम मंदिर निर्माण के पक्ष में फैसला आया तो मंदिर के ट्रस्टियों में केंद्र सरकार ने कामेश्वर चौपाल को भी जगह दी। वे विश्व हिंदू परिषद से जुड़े थे और विधान परिषद सदस्य रहे थे। किडनी ट्रांसप्लांट के बाद संक्रमण के कारण उनकी तबियत लगातार बिगड़ती जा रही थी। डॉक्टरों ने हाल ही में स्थिति को गंभीर बताते हुए हाथ खड़े कर दिए थे।
24 अप्रैल 1956 को बिहार के सुपौल जिला के मरौना प्रखंड के कमरैल गांव में जन्मे कामेश्वर चौपाल का पूरा जीवन ईश्वर के काम में समर्पित रहा। वह 1980 के दशक में मधेपुरा में संघ के जिला प्रचारक हुआ करते थे। 1982-83 में विश्व हिंदू परिषद के प्रांत संगठन मंत्री रहे। 1985 में मिथिला विश्वविद्यालय दरभंगा से एमए की डिग्री ली।
1989 में जब राम मंदिर का आंदोलन तेज हुआ तो मंदिर निर्माण की पहली ईंट रखने का सौभाग्य भी कामेश्वर चौपाल को ही मिला। बिहार के सह संगठन मंत्री होने के नाते कामेश्वर चौपाल भी अयोध्या में मौजूद थे। तब पूर्व में लिए गए निर्णय के अनुसार धर्मगुरुओं ने कामेश्वर चौपाल को शिलान्यास के लिए पहली ईंट रखने को कहा। चौपाल इसके पहले तक अनजान थे। तब चौपाल ने बताया था कि हालांकि उन्हें यह पता था कि धर्मगुरुओं ने किसी दलित से ईंट रखवाने का निर्णय लिया है, लेकिन वे स्वयं होंगे, यह उनके लिए संयोग रहा। शिलान्यास के बाद से ही कामेश्वर चौपाल चौपाल का नाम पूरे देश में छा गया। मंदिर निर्माण आंदोलन में सक्रिय भूमिका की वजह से आरएसएस ने उन्हें पहले कारसेवक का दर्जा दिया।
वर्ष 1991 में कामेश्वर चौपाल ने राजनीति में कदम रखा और सात मई 2002 से 6 मई 2014 तक भाजपा कोटे से बिहार विधान परिषद के सदस्य रहे। 1991 में बिहार के रोसड़ा विधानसभा में चुनाव लड़े थे, लेकिन हार गए। इसके बाद 1995 में बेगूसराय के बखरी विधानसभा से टिकट मिला था। यहां भी हार का सामना करना पड़ा था। 2014 में उन्होंने सुपौल से लोकसभा का चुनाव भी लड़ा, हालांकि उन्हें सफलता नहीं मिली।