अयोध्या। दीपोत्सव में इस बार रामनगरी भारतीय लोक संस्कृति के विविध रंगों से सराबोर होगी। मध्य प्रदेश के आल्हा गायन, गुजरात के गरबा, राजस्थान के कालबेलिया और मथुरा के मयूर नृत्य की प्रस्तुतियां आकर्षण का केंद्र बनेंगी। अवध और ब्रज की सांस्कृतिक परंपराएं भी रामनगरी की विरासत को जीवंत करेंगी। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी दीपोत्सव का हिस्सा बनेंगी। इस बार पांच देशों की रामलीला का मंचन होने की संभावना है।
पांच से आठ नवंबर तक होने वाले दीपोत्सव में तीन हजार से अधिक कलाकारों के शामिल होने का अनुमान है। इस दौरान अयोध्या में लोकगीत, पारंपरिक नृत्य और क्षेत्रीय कलाओं का अनूठा संगम देखने को मिलेगा। मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, पंजाब, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, छत्तीसगढ़, बिहार और राजस्थान समेत विभिन्न राज्यों के कलाकारों को आमंत्रित करने की तैयारी है। मध्य प्रदेश के करीब एक दर्जन कलाकार आल्हा गायन प्रस्तुत करेंगे। केरल की कठपुतली कला, गुजरात का गरबा और राजस्थान का कालबेलिया नृत्य भी सांस्कृतिक कार्यक्रमों का हिस्सा होंगे।
लोक संस्कृति के इस आयोजन में उत्तर प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों की पारंपरिक कलाओं को भी प्रमुखता दी जाएगी। मथुरा के कलाकार मयूर नृत्य के माध्यम से ब्रज की सांस्कृतिक पहचान प्रस्तुत करेंगे, जबकि आजमगढ़ का धोबिया नृत्य और सोनभद्र का आदिवासी नृत्य क्षेत्रीय लोक परंपराओं से परिचित कराएगा। झांसी का राई नृत्य भी आयोजन का हिस्सा होगा। इन प्रस्तुतियों के जरिये विभिन्न क्षेत्रों की लोकशैली, संगीत, वेशभूषा और परंपराओं को एक मंच पर लाने की तैयारी है।
शोभायात्रा में दिखेंगी 20 से अधिक झांकियां
दीपोत्सव के दिन सात नवंबर की सुबह साकेत महाविद्यालय से रामकथा पार्क तक शोभायात्रा निकाली जाएगी। इसमें 20 से अधिक झांकियां शामिल होंगी। रामकथा पर आधारित झांकियों के साथ रामराज्याभिषेक का दृश्य भी प्रदर्शित किया जाएगा। शोभायात्रा और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के लिए कलाकारों के चयन की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। प्रस्तुतियों के लिए प्रशिक्षित कलाकारों का चयन किया जाएगा।
इन स्थानों पर बनेंगे सांस्कृतिक मंच
दीपोत्सव के लिए शहर में करीब 15 छोटे-बड़े सांस्कृतिक मंच बनाए जाने की योजना है। नयाघाट पर सबसे बड़ा मंच प्रस्तावित है, जबकि गुप्तार घाट और बड़ी देवकाली में भी प्रमुख सांस्कृतिक मंच तैयार किए जाएंगे। रामघाट, बिड़ला धर्मशाला, भरतकुंड, तुलसी उद्यान, भजन संध्या स्थल, नाका हनुमानगढ़ी और धर्मपथ समेत अन्य स्थानों पर भी कलाकार प्रस्तुतियां देंगे। रामकथा पार्क में आधुनिक तकनीक पर आधारित प्रदर्शनी आयोजित करने की योजना है।