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Auraiya News: ये कैसी निगरानी...मंडी का धर्मकांटा खराब, व्यापारियों की मनमानी

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औरैया। मंडी में जिन पर निगरानी का जिम्मा है वही, शासन और प्रशासन की आंखों में धूल झोंक रहे हैं। धर्मकांटा बंद होने के चलते व्यापारी धड़ल्ले से धान की खरीद कर उसे ले जा रहे हैं। दरअसल, धर्मकांटे पर होने वाली तौल के अनुसार ही आढ़ती मंडी को टैक्स देते हैं। जिम्मेदार मौन हैं, क्योंकि उनकी की मिलीभगत से यह खेल चल रहा है।
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हाईवे स्थित मंडी में कदम-कदम पर अनियमितताएं हो रही हैं। किसानों की कमाई तो लूटी ही जा रही है, वहीं मंडी समिति को भी राजस्व का नुकसान पहुंच रहा है। मंडी में आढ़ती के माध्यम से व्यापारी किसानों से उपज की खरीद करते हैं। इन दिनों धान की अधिक आवक के चलते प्रतिदिन मंडी में 50 से 60 हजार बोरी धान की बिक्री होती है। कभी-कभी यह आंकड़ा और भी ऊपर चला जाता है। खरीद के बाद व्यापारी धान को मिल या गोदामों में भेजते हैं। इसकी निगरानी के लिए मंडी के गेट पर धर्मकांटा बना है। इसी धर्मकांटे से पहले मंडी में आने वाले व्यापारियों के खाली ट्रक का वजन किया जाता है और बाहर जाते समय माल समेत वजन किया जाता है। इससे ही यह तय होता है कि किस आढ़ती के माध्यम से किस व्यापारी ने कितना धान खरीदा। इसी धान के वजन और कीमत पर डेढ़ प्रतिशत टैक्स मंडी समिति को मिलता है।
लेकिन इन दिनों मंडी में अलग ही खेल चल रहा है। मंडी समिति के गेट पर लगा धर्मकांटा लंबे समय से खराब पड़ा हुआ है। ऐसे में मिलीभगत से व्यापारियों धान खरीदकर बाहर भेज रहा हैं। तौल न होने से इसमें मनमानी तौल दर्ज कराई जा रही है। इससे मंडी समिति को टैक्स का भी नुकसान हो रहा है। लेकिन जिम्मेदारों को सरकार के खजाने से नहीं बल्कि अपनी सेटिंग से मतलब है।
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मंडी समिति के अधिकारी और कर्मचारी दावा करते हैं कि उन्हें मंडी से बाहर जाने वाले हर ट्रक में लदे धान की जानकारी होती है। लेकिन, उनके पास इस बात का कोई जवाब नहीं कि आखिर उनके पास ऐसा कौन सा स्कैनर है जिससे बिना वजन किए है उन्हें पता चल जाता है कि ट्रक में कितना धान है।
धान लादकर बाहर जाने वाले वाहन को मंडी के गेट पर गेट पास दिखाना होता है। इस पर धान की मात्रा, आढ़ती का नाम, व्यापारी का नाम और ट्रक का पूरा ब्योरा दर्ज होता है। इसके बाद ही गाड़ी को बाहर जाने की अनुमति दी जाती है। लेकिन, मंडी में गेट पर गेट पास से नहीं इशारे से गाड़ी पास होती है। चालक दूर से ही इशारा कर बता देता है कि गाड़ी किसकी है, इसके बाद गाड़ी बिना किसी पूछताछ के बाहर निकल जाती है।
वर्जन
मंडी में निरीक्षण कर अव्यवस्थाएं देखीं जाएंगी। धर्मकांटा क्यों बंद है, इसकी भी जांच की जाएगी। जो भी कमियां हैं उन्हें दूर कर जिम्मेदारों की जवाबदेही तय की जाएगी।
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-कमल कुमार सिंह, डिप्टी कलेक्टर व सभापति मंडी समिति।
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