औरैया। हाईवे से सटे भगौतीपुर में 2.64 करोड़ की लागत से बना ट्रॉमा सेंटर अपनी पहचान तलाश रहा है। इस अत्याधुनिक ट्रॉमा सेंटर पर चार साल से ताला लटका है।
लोकार्पण के चार साल बाद भी यहां किसी मरीज का इलाज नहीं हो सका। अब प्रशासन ने इसे मार्च तक शुरू कराने का दावा किया है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि अभी यहां मशीनें और उच्च क्षमता का बिजली कनेक्शन ही नहीं है।
ट्रॉमा सेंटर का निर्माण वर्ष 2019 में शुरू हुआ था। छह नवंबर 2021 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसका वर्चुअल लोकार्पण किया, लेकिन उसके बाद भी यह भवन झाड़ियों और वीरानी के बीच सन्नाटा झेलता रहा। सड़क हादसों में घायल मरीज आज भी सैफई और कानपुर जैसे हायर सेंटर रेफर किए जा रहे हैं।
वहीं, हाईवे से पास होने के चलते यहां घायलों को कम समय में उपचार मिल सकता है। अब तक हाईवे पर होने वाली दुर्घटनाओं में मरीजों को मेडिकल कॉलेज भेजा जाता है, जो करीब 10 किलोमीटर है। घायल के लिए यह दूरी तय करने में लगने वाला समय जानलेवा साबित होता है।
डीएम डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी के निर्देश के बाद स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी रोज ट्रॉमा सेंटर का निरीक्षण कर रहे हैं। मार्च तक संचालन शुरू करने की बात कही जा रही है, लेकिन हकीकत में जो व्यवस्था चार वर्षों में नहीं बन पाई उसे इतनी जल्दी शुरू करना आसान नहीं होगा। जिले में डॉक्टर की कमी भी इसमें रोड़ा बनेगी।
असल में ट्रॉमा सेंटर में अभी तक आवश्यक चिकित्सा उपकरण नहीं लगाए जा सके हैं। इसके अलावा यहां सिर्फ गांव की सामान्य बिजली लाइन से कनेक्शन है, जो उच्च क्षमता वाले उपकरणों के लिए पर्याप्त नहीं है।
नया हाई लोड कनेक्शन लेना भी लंबी प्रक्रिया है। इस बीच बड़े जेनरेटर व सोलर संयंत्र के लिए शासन को प्रस्ताव भेजने की बात कही गई है। हालांकि ये प्रस्ताव कब तक मंजूर होगा और होगा भी या नहीं, यह किसी को नहीं पता।
डॉक्टरों की भारी कमी बनी सबसे बड़ी बाधा
जिले में पहले से ही चिकित्सकों की कमी है। स्वास्थ्य विभाग के पास इस समय केवल 78 डॉक्टर कार्यरत हैं, जबकि स्वीकृत पद 150 हैं। ऐसे में यदि ट्रॉमा सेंटर के लिए डॉक्टरों की तैनाती की गई तो अन्य अस्पतालों की व्यवस्था कैसे संभलेगी। एक साल पहले सीएमओ की ओर से शासन को रिमाइंडर भेजकर 50 नए पदों के सृजन की मांग की गई थी। अभी तक एक चिकित्सक भी नहीं मिला है। चिकित्सकों की तैनाती यहां करना चुनौतीपूर्ण कार्य है।
मार्च तक खुला तो जगेगी उम्मीद की किरण
ट्रॉमा सेंटर नेशनल हाईवे से सटे होने के कारण यहां आए दिन सड़क हादसे होते हैं। गंभीर घायलों को समय पर इलाज न मिलने से जानें जाती हैं। यदि यह ट्रॉमा सेंटर शुरू हो जाता है तो जिले के हजारों लोगों को बड़ी राहत मिलेगी और यह दुर्घटनाग्रस्त मरीजों के लिए मील का पत्थर साबित होगा।
ये हुए हादसे
- इटावा-कानपुर नेशनल हाईवे पर 13 फरवरी 2025 व 10 मार्च 2025 को दो हादसे हुए, इसमें तीन लोगों की मौत हो गई।
- औरैया मंडी समिति-जालौन कट पर 26 मई 2025, 17 मार्च 2025 व 29 सितंबर 2025 को तीन हादसे हुए। इनमें चार लोगों की जान चली गई।
ट्रॉमा सेंटर को जल्द शुरू कराने की तैयारी की जा रही है। चिकित्सकों की डिमांड शासन को भेजी जा चुकी है। मशीन व उपकरण लगाने का काम जल्द शुरू कराया जाएगा। अभी जिले के ही कुछ चिकित्सकों की तैनाती कर इसे शुरू कराने का प्रयास है, ताकि लोगों को इसका लाभ मिलने लगे। बाद में स्टाफ बढ़ा दिया जाएगा। मार्च में इसे शुरू कराने का प्रयास है।
- डॉ. सुरेंद्र कुमार, सीएमओ
फोटो-18-ट्रॉमा सेंटर का बंद गेट। संवाद
फोटो-18-ट्रॉमा सेंटर का बंद गेट। संवाद