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Auraiya News: जातियों का जहर बो दिया, भाई ने भाई को खो दिया...

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रचना प्रस्तुत करते कवि।  - फोटो : संवाद
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अजीतमल। जनता महाविद्यालय के बीएड संकाय प्रांगण में सोमवार रात अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय प्रबंध समिति के मंत्री उत्तम दुबे ने मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्जवलित कर किया।
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सबसे पहले आगरा से आईं प्रसिद्ध कवयित्री योगिता चौहान ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। उन्होंने पढ़ा कि हमने पलकों की जगह बिछाया है दिल, अब भी आएं नहीं वो तो मैं क्या करूं... को श्रोताओं ने खूब पसंद किया। रचना त्रिपाठी ने समाज की विषमताओं पर तीखा प्रहार करते हुए कहा- जातियों का जहर बो दिया, भाई ने भाई को खो दिया। उनकी भावनात्मक अभिव्यक्ति ने सभागार को आत्ममंथन की ओर प्रवाहित कर दिया। इटावा से आए युवा ओज कवि रोहित चौधरी ने प्रखर शब्दों में कहा-धरती का कण-कण बोले अब भारत मां की जय। डॉ. राजीव राज की दार्शनिक रचना गीत मकरंद है महकेंगे हमेशा यारों, सांस की पंखुड़ी तो सूखकर झड़ जाती है... ने जीवन की क्षणभंगुरता का गहरा बोध कराया।
कवि सतीश मधुप की ओजस्वी वाणी मां की चादर श्वेत वर्ण की इस पर दाग न लग जाए, मंदिर-मस्जिद के झगड़े में झंडा मत झुकने देना पर सभागार भारत माता की जय के नारों से गूंज उठा। गीता चतुर्वेदी की कविता एक पल को भी पलकें झुकानी नहीं... ने वातावरण को कोमलता और माधुर्य से भर दिया। हास्य कवि दीपक शुक्ला ‘दनादन’ ने चुटीले व्यंग्य से ठहाके बटोरे, तो सबरस मुरसानी ने ऊर्जावान काव्य देश के प्यार में लेकिन कोई पागल नहीं मिलता’ से सम्मेलन को चरम पर पहुंचा दिया। सबरस मुरसानी ने पढ़ा मत उलझो मेरे वतन से नहीं तो मर जाओगे कसम से ने श्रोताओं को तालीबजाने पर मजबूर कर दिया। इस अवसर पर विद्यालय स्टाफ सहित छात्र एवं गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।
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