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Auraiya News: कोर्ट में हाजिर नहीं हुई वादी, खारिज हो गई याचिका

Sat, 06 Jun 2026 11:41 PM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
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औरैया। अपर सत्र न्यायाधीश की अदालत में चल रहे एक मामले में वादी की लापरवाही भारी पड़ गई। कोर्ट में बार-बार पुकारने के बावजूद वादी की ओर से कोई उपस्थित नहीं हुआ। इसके बाद न्यायालय ने मामले को खारिज कर दिया है।
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न्यायालय में दुर्गा कुशवाह बनाम राज्य व अन्य 2025 का मामला विचाराधीन था। मामले की सुनवाई के लिए शनिवार तय था। लंच के बाद जब पत्रावली दोबारा पेश की गई तो वादी पक्ष की ओर से कोई भी उपस्थित नहीं हुआ।
अदालत ने पत्रावली का अवलोकन करते हुए पाया कि विगत कई तिथियों से वादी की ओर से कोई भी पैरवी के लिए नहीं आ रहा है। इससे पहले भी न्यायहित में वादी को अंतिम अवसर दिया गया था लेकिन इसके बावजूद आज न तो कोई उपस्थित हुआ और न ही स्थगन प्रार्थना पत्र ही दाखिल किया गया। न्यायाधीश राजीव कुमार वत्स ने नाराजगी जताते हुए याचिका खारिज कर दी।
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बिजली चोरी के दो आरोपी दोषमुक्त

औरैया। विशेष न्यायाधीश विद्युत अधिनियम राजीव कुमार वत्स की अदालत ने बिजली चोरी के दो अलग-अलग मामलों में आरोपियों को दोषमुक्त करते हुए मुकदमों को निस्तारित कर दिया है। यह राहत विद्युत अधिनियम के तहत बकाया व शमन शुल्क जमा करने के बाद मिली है।
पहले मामले में अजीतमल थाना क्षेत्र के राकेश कुमार पर साल 2015 में विद्युत अधिनियम में मुकदमा दर्ज हुआ था। दूसरे मामले में अयाना थाना क्षेत्र की आशा देवी के खिलाफ साल 2018 में दर्ज हुए बिजली चोरी के मामले में सुनवाई की गई। कोर्ट ने दोनों की दलीलों को सुनने के बाद आरोपियों को बरी कर दिया। (संवाद)

विस्फोटक पदार्थ अधिनियम मामले में जमानत

औरैया। विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के एक मामले में आरोपी अनुज चौबे को जिला न्यायालय ने आरोपी की ओर से प्रस्तुत दूसरे जमानत प्रार्थना पत्र पर सुनवाई की। कोर्ट ने सुनवाई के बाद आरोपी को रिहा करने का आदेश दिया। आरोपी पिछले करीब 15 माह से आरोपी जेल में बंद था।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, घटना 11 अगस्त 2016 की है। पुलिस को सूचना मिली थी कि गोविंद नगर गेट के पास एक व्यक्ति हथगोला लेकर जा रहा था, जो उसके हाथ में ही फट गया। इस हादसे में वह स्वयं गंभीर रूप से घायल हो गया था और पास खड़े दो अन्य व्यक्ति भी घायल हुए थे। मौके से बिना नंबर की स्कूटी और बम के अवशेष बरामद किए गए थे।
अदालत में आरोपी के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि अनुज पूर्व में न्यायालय से जमानत पर रिहा था और नियमित रूप से पेशी पर आ रहा था। इसी बीच वह नौकरी के सिलसिले में बाहर चला गया, जिस कारण वह निर्धारित तिथियों पर उपस्थित नहीं हो सका। अनुपस्थिति के चलते उसके विरुद्ध गैर-जमानती वारंट जारी हुए और 14 फरवरी 2025 को उसे मामले में तलब कर जेल भेज दिया गया था।

सत्र न्यायाधीश पारूल जैन ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जमानत मंजूर की। न्यायालय ने आरोपी को 50 हजार रुपये का व्यक्तिगत बंधपत्र और समान धनराशि के दो जमानती दाखिल करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने मामले से जुड़े किसी भी गवाह या व्यक्ति को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से धमकाएगा नहीं और न ही किसी प्रकार का प्रलोभन देगा। (संवाद)
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कोर्ट ने खारिज की रजनी देवी की अर्जी

औरैया। विशेष न्यायाधीश एससी-एसटी एक्ट विकास गोस्वामी की अदालत ने रजनी देवी की ओर से विपक्षीगणों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने के प्रार्थना पत्र को खारिज कर दिया है।
न्यायालय ने प्रारंभिक जांच आख्या और साक्ष्यों के अवलोकन के बाद मामले को संदिग्ध माना। रजनी देवी ने धारा 173 (4) बीएनएसएस के तहत अर्जी देकर आरोप लगाया था कि 20 अप्रैल 2026 को बाजार से लौटते समय विपक्षियों ने उन्हें जातिसूचक गालियां दीं और पीटा। सीओ अजीतमल की जांच में सामने आया कि दोनों पक्षों में पुराना मनमुटाव है।
घटना वाले दिन ही पुलिस ने शांतिभंग में महिला के देवर का चालान किया था, जिसे कोर्ट से छिपाया गया। अदालत ने टिप्पणी की कि मेडिकल रिपोर्ट तीन दिन बाद की है और घटना के समय 112 नंबर पर भी कोई कॉल नहीं की गई। सुप्रीम कोर्ट की व्यवस्था का हवाला देते हुए अदालत ने याचिका को निरस्त कर दिया। (संवाद)
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साक्ष्य के अभाव में चार बरी
औरैया। विशेष न्यायाधीश विकास गोस्वामी की अदालत ने एससी-एसटी एक्ट के एक मामले में अभियुक्तों को दोषमुक्त कर दिया है। कोर्ट ने साक्ष्यों के अभाव और अभियोजन पक्ष के कथानक में विरोधाभास पाए जाने के चलते गांव शाला मंदिर निवासी चरनजीत उर्फ चरन सिंह, टिन्कू, रामचन्द्र और लाखन को सभी आरोपों से बरी कर दिया है।
मामला 29 मई 2017 का है। परिवादिनी रामकली ने आरोप लगाया था कि उक्त अभियुक्तों ने उनके साथ गाली-गलौज की, जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया और घर घुसकर पीटा। शनिवार को मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि घटना के बाद परिवाद करीब सात माह बाद न्यायालय में प्रस्तुत किया गया, जिसका कोई यथोचित कारण नहीं बताया गया।
साक्ष्यों से स्पष्ट हुआ कि उसी घटना के दिन अभियुक्त चरनजीत ने परिवादिनी के बेटों के खिलाफ एनसीआर दर्ज कराई थी। मामले के स्वतंत्र गवाह अपनी गवाही में अभियोजन के आरोपों का समर्थन नहीं किया और पक्षद्रोही हो गए। इससे आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया गया। (संवाद)
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