फोटो-3- भाई का तिलक करती बहन। संवाद
औरैया। फाल्गुन मास की पूर्णिमा को होली का पर्व मनाने के बाद चैत माह की द्वितीया तिथि यानि बृहस्पतिवार को भाई दूज का पावन पर्व मनाया गया। धार्मिक और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार यह दिन भाई-बहन के अटूट प्रेम, रक्षा और मंगलकामना का प्रतीक है। इस अवसर पर बहनें अपने भाइयों के लिए व्रत रखकर तिलक करती हैं और उनके सुख-समृद्धि और दीर्घायु की प्रार्थना करती हैं।
हर घर में बहनों ने पूजा की थाली सजाई। बहनों ने भाई का तिलक कर आरती उतारी और मुंह मीठा कराया। साथ ही नारियल भेंट किया।
सुबह से शुरू हुआ शुभ मुहूर्त शाम पांच बजे तक जारी रहा। ऐसे में विवाहित बहनों के घर आने जाने के लिए भाई-बहनों का आवागमन जारी रहा। भाइयों ने भी बहनों को गिफ्ट दिए। पर्व पर भाई-बहनों में खासा उत्साह देखने को मिला। शहर कस्बों से लेकर गांवों तक भाईदूज को लेकर उत्सव का माहौल रहा।
फोटो-3- भाई का तिलक करती बहन। संवाद