औरैया। डॉक्टर और मरीज दोनों को उपचार के लिए दवाओं का ही भरोसा होता है, लेकिन जिले में दवाओं के नमूने लगातार फेल हो रहे हैं। हाल ही में आई एक जांच रिपोर्ट में दो एंटीबायोटिक दवाओं एफरोपोर्ट-50 ड्राई सिरप व मेटलिन 250 टैबलेट के नमूने फेल हो गए। जांच रिपोर्ट के आधार पर निर्माता के विरुद्ध कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
दवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित कराने और उनकी जांच के लिए औषधि निरीक्षक दवाओं के नमूने लेकर जांच के लिए भेजते हैं। इसी के तहत औषधि निरीक्षक ज्योत्सना आनंद ने अक्तूबर 2025 में मां वैष्णो मेडिकल स्टोर रामगढ़ से एफरोपोर्ट-50 ड्राई सिरप का और श्याम मेडिकल स्टोर बाबरपुर से मेटलिन 250 टैबलेट का नमूना लिया था। दोनों नमूने जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे गए थे। अब जांच रिपोर्ट आई तो दोनों नमूने फेल पाए गए।
एफरोपोर्ट-50 ड्राई सिरप में एंटीबायोटिक सेफपोडॉक्सिम की मात्रा 63.27 प्रतिशत ही पाई गई। इसी तरह मेटलिन-250 टैबलेट में एंटीबायोटिक लिवोफ्लॉक्सासिन की मात्रा आधे से भी कम यानी 38.05 प्रतिशत मिली। इसके अलावा इसमें घुलनशीलता भी गड़बड़ मिली। घुलनशीलता टेस्ट में यह दवा फेल हो गई। ऐसे में एंटीबायोटिक दवाएं जिले में कितनी भरोसेमंद हैं, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है।
बीते तीन माह में करीब सात दवाओं के नमूने जांच में फेल पाए जा चुके हैं। इसमें चार एंटीबायोटिक फेल हुई हैं। ऐसे में कहीं न कहीं एंटीबायोटिक दवाओं में गड़बड़ी की आशंका बढ़ती जा रही है। (संवाद)
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निर्माता कंपनियों से मांगा जाएगा जवाब
दवाओं के नमूने फेल आने के बाद इन दवाओं को बनाने वाली कंपनियों से जवाब मांगा जाएगा। इसमें एफरोपोर्ट-50 ड्राई सिरप हिमाचल प्रदेश की बद्दी स्थित डीकॉट हेल्थकेयर द्वारा बनाई गई थी। वहीं मेटलिन-250 टैबलेट अहमदाबाद की कंपनी एबन फार्मास्यूटिकल्स ने बनाई थी। दोनों ही कंपनियों को नोटिस जारी किया गया है। जवाब आने के बाद न्यायालय में मुकदमा दायर किया जाएगा।
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मेडिकल स्टोर को विक्रय न करने का आदेश
जांच में फेल हुई दवाओं के संबंध में मेडिकल स्टोर संचालकों को भी आदेश जारी किया गया है। इसमें उन्हें मेडिकल स्टोर के स्टॉक में उपलब्ध इन दवाओं का विक्रय तत्काल बंद करने के लिए कहा गया है। क्योंकि अगर इन दवाओं का विक्रय किया जाता है तो यह गलत होगा। साथ ही उनसे क्रय-विक्रय की भी जानकारी मांगी गई है।
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इन बीमारियों में काम आती हैं दवाएं
चिचौली स्थित मेडिकल कॉलेज के सीएमएस डॉ. पवन कुमार शर्मा ने बताया की सेफपोडॉक्सिम का उपयोग बैक्टीरिया के कारण होने वाले कुछ संक्रमणों के इलाज के लिए किया जाता है। वहीं लिवोफ्लॉक्सासिन का उपयोग फेफड़ों व मूत्र संबंधी संक्रमण के इलाज के लिए होता है।
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वर्जन
दो एंटीबायोटिक दवाओं के नमूने जांच में फेल हुए हैं। जांच रिपोर्ट के आधार पर कंपनियों को नोटिस भेजकर जवाब मांगा गया है। जवाब आने के बाद कार्रवाई की जाएगी।
-ज्योत्सना आनंद, औषधि निरीक्षक।