संवाद न्यूज एजेंसी
औरैया/सहार।
सहार थाना क्षेत्र के पुरवा जैन में झोलाछाप के गलत इलाज से युवती की मौत के मामले में मां की तहरीर पर पुलिस ने झोलाछाप के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज किया। हिरासत में लिए गए क्लीनिक संचालक को मंगलवार को पुलिस ने जेल भेज दिया है।
सहार क्षेत्र के तिलकपुर निवासी सुनीता देवी ने मंगलवार सुबह पुलिस को तहरीर दी। जिसमें बताया कि उनकी बेटी ज्योति (25) दिल्ली में रहकर प्राइवेट नौकरी करती थी। कुछ दिन पहले ही वह घर आई थी। सोमवार सुबह सात बजे के करीब बेटी को उल्टी दस्त आने शुरू हुए। इस पर वह बेटी को पुर्वा जैन के झोलाछाप सुभाष कुशवाहा के यहां लेकर पहुंचीं। आरोप है लगाया कि झोलाछाप ने उसे ड्रिप लगा दी। इसके कुछ देर बाद बेटी का हालत बिगड़ गई और उसकी मौत हो गई। इसके बाद वह लोग बेटी को लेकर जिला अस्पताल पहुंचे। जहां पर डॉक्टरों ने बेटी को मृत घोषित कर दिया। थानाध्यक्ष कालीचरन ने बताया कि तहरीर के आधार पर रिपोर्ट दर्ज कर झोलाछाप व क्लीनिक संचालक सुभाष कुशवाहा को गिरफ्तार कर जेल भेजा है।
अवैध अस्पतालों को लेकर डीएम के तेवर सख्त बोली होगी कठोर कार्रवाई
औरैया। अस्पतालों के पंजीकरण से लेकर अब तक की गई छापेमारी को लेकर स्वास्थ्य विभाग सवालों के घेरे में है। पिछले एक सप्ताह पहले जिलाधिकारी द्वारा गठित की गई तहसील स्तरीय टीमों में अजीतमल, बिधूना, औरैया नगर में कई जगह छापेमारी हुई। 10 से अधिक अस्पताल व क्लीनिक संचालक को नोटिस दिया गया। कई संचालकों ने नोटिस का जवाब तक नहीं दिया है। जिलाधिकारी ने जिले के अस्पतालों की जांच कराकर कठोर कार्रवाई की बात कही है।
जिले में स्वास्थ्य सेवाओं के साथ खिलवाड़ किया जा रहा
विभाग के आंकड़ों की बात की जाए तो जिले में 24 अस्पताल, 28 एलोपैथिक हॉस्पिटल, तीन क्लीनिक व 30 पैथालॉजी पंजीकृत है। मगर जिले में एक सैकड़ा से अधिक अस्पताल, क्लीनिक, पैथालॉजी बिना पंजीकरण के चोरी छिपे संचालित हो रहे हैं। कई बार इन पर छापेमारी हुई तो पोल खुली। विभाग ने नोटिस देकर जवाब मांगा, कुछ दिन के लिए प्रतिष्ठान बंद करा दिए। इसके बाद कब जवाब आया, कब प्रतिष्ठान संचालित होने लगे, इसकी जानकारी किसी को नहीं हो सकी। यही कारण है कि जिले में स्वास्थ्य सेवाओं के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। पिछले 15 दिनों में अजीतमल, बिधूना, सहार में चार मौतें झोलाछाप के गलत इलाज से हो गई। कुछ मामलों में रिपोर्ट भले ही दर्ज करा दी गई हो, मगर न तो पुलिस ने कार्रवाई की और न ही विभाग ने कार्रवाई की।
तत्कालीन सीएमओ की कार्रवाई में भी खुली थी पोल
पिछले वर्ष अछल्दा, बिधूना, ऐरवाकटरा के निजी अस्पतालों में प्रसूताओं की मौत के बाद तत्कालीन जिलाधिकारी प्रकाश चंद्र श्रीवास्तव के निर्देश पर टीम गठित कर छापेमारी की गई। तत्कालीन सीएमओ डॉ. अर्चना श्रीवास्तव भी छापेमारी करने निकली। इस दौरान अछल्दा, बिधूना, ऐरवाकटरा, अजीतमल समेत नगर के करीब 10 अस्पताल सील कर बंद कराए गए। मगर विभागीय कार्रवाई न होने से अस्पताल फिर से संचालित होने लगे और विभाग ने अपली नजरे फेर लीं। इन्हीं एक बिधूना के भरथना रोड का लक्ष्मी हॉस्पिटल भी शामिल है। जो पूर्व में बीमा अस्पताल के नाम से संचालित होता था। प्रसूता की मौत के बाद इसे बंद कराकर संचालक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई। इस मामले में आज तक कड़ी कार्रवाई नहीं हुई।
न भवनों का मानक, न एनओसी
अस्पताल पंजीकरण कराने में जिन मानकों को पूरा किया जाना चाहिए, वह मानक कुछ अस्पतालों को छोड़कर अधिकांश के पूरे नहीं है। इसके बाद भी मानकों को पूरा कराए बैगर ही जिले में अस्पताल संचालन के लिए लाइसेंस दिए गए हैं। अस्पताल संचालकों की अच्छी पकड़ और साठगांठ होने के कारण इनके धंधे फल फूल रहे हैं। उन्हीं को देख झोलाछाप भी अपनी दुकानें सजाकर बैठ गए हैं। सहार में युवती की मौत के मामले जांच करने पहुंची स्वास्थ्य टीम को परचून व कपड़ा दुकान की आड़ में झोलाछाप क्लीनिक चलाता मिला। सवाल है कि जब स्वास्थ्य केंद्र प्रभारियों से समय समय पर रिपोर्ट मांगी जाती है तो ऐसे मामले सामने क्यों नहीं आते।
तहसील स्तर पर हुई छापेमारी की अभी तक आख्या नहीं मिली है। आख्या मिलने और संचालकों से जवाब मिलने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। झोलाछाप व मानक विहीन अस्पतालों के खिलाफ अभियान चलाकर कार्रवाई की जा रही है। - डॉ. देव नारायण कटियार, नोडल, पंजीकरण
तहसील स्तर पर एसडीएम, सीओ व स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी के नेतृत्व में टीम गठित की गई थी। इसमें आख्या आने की जरूरत नहीं है। विभाग को कार्रवाई करनी चाहिए। बिधूना जो अस्पताल गलत तरह पंजीकरण किया गया है। इसमें संबंधित नोडल अधिकारी से जवाब भी मांगा गया है। अवैध, बिना पंजीकरण के संचालित हो रहे अस्पतालों की रिपोर्ट मांगी गई है। इस मामले में जो भी दोषी पाए जाएंगे कड़ी कार्रवाई होगी। - नेहा प्रकाश, जिलाधिकारी