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दो साल से शासन में लटका सीवरेट ट्रीटमेंट प्लांट का प्रस्ताव

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औरैया। यमुना में गंदे पानी के उत्प्रवाह को रोकने के लिए सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (सीटीपी) लगाने की योजना ठंडे बस्ते में चली गई। नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल (एनजीटी) की सख्ती के बाद पालिका प्रशासन ने जल निगम के साथ मिलकर 2020 में 80 करोड़ रुपये का प्रस्ताव स्वीकृति के लिए शासन को भेजा था, लेकिन आज तक उस पर कोई संस्तुति नहीं हो सकी है। जिससे स्थिति जस की तस बनी हुई है।
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शहर में रोजाना गंदा पानी दो नालों से होकर यमुना नदी में पहुंच रहा है। मई 2020 में एनजीटी के अधिकारियों ने निरीक्षण के दौरान नदी में प्रदूषण के बढ़ते स्तर को लेकर चिंता जताई थी। साथ ही पालिका प्रशासन को सीटीपी के लिए प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजने के निर्देश दिए थे। प्रस्ताव पर अमल न होने से शहर हजारों गैलन दूषित पानी यमुना नदी में गिर रहा है।
बता दें कि नगरपालिका परिक्षेत्र के जालौन रोड नाला से रोजाना 10 मिलियन लीटर दूषित पानी व दयालपुर पचपेड़ा नाला से प्रतिदिन 2.37 मिलियन लीटर गंदा पानी यमुना नदी में गिर रहा है। भेजे गए प्रस्ताव में जालौन रोड नाले के प्रति लीटर पानी में 70 एमजी बायो केमिकल ऑक्सीजन डिमांड व 130 एमजी केमिकल ऑक्सीजन
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डिमांड व दयालपुर नाले के प्रति लीटर पानी में 65 एमजी बायो केमिकल आक्सीजन व 116 एमजी केमिकल आक्सीजन प्रदूषण का स्तर है। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रदूषण का यह लेवल काफी खतरनाक है। यह नदी में पहुंचकर पानी को जहरीला बना रहा है। एनजीटी की ओर से प्रदूषण को लेकर चिंता जताई गई थी।
सीटीपी के लिए लगभग दो साल पहले प्रस्ताव बनाकर स्वीकृति के लिए शासन को भेजा गया था। जिस पर आज तक मंजूरी नहीं मिली है। इस बाबत सितंबर 2021 को भी रिमांडर भेजा जा चुका है।- बलवीर सिंह, अधिशाषी अधिकारी, नगर पालिका परिषद, औरैया।
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