औरैया। शासन द्वारा चलाईं जा रहीं 102 और 108 एंबुलेंस का लाभ लाभार्थियों को मुश्किल से मिल रहा है। देरी के कारण लोग अपने खर्चे से अस्पताल पहुंच रहे हैं। एंबुलेंस न मिलने के बाद भी कंट्रोल रूम से फोन कर सेवा के बारे में पूछा जा रहा है।
गर्भवती महिलाओं और सड़क दुर्घटनाओं में घायलों को अस्पतालों तक पहुंचाने के लिए 102 और 108 एंबुलेंस सेवा है। लेकिन कंट्रोल रूम फोन करने के बाद भी एंबुलेंस चालक समय से नहीं पहुंच रहे हैं। सही लोकेशन न मिलने का कारण बता चालक किनारा कर रहे हैं। पिछले दिनों एंबुलेंस चालकों की हड़ताल से समस्या और विकराल हो गई। हड़ताल के दौरान अस्पताल तक जाने के लिए निजी एंबुलेंस का सहारा लेना पड़ा। सेवा तो लोगों को नहीं मिली बल्कि अब कंट्रोल रूम से यह जानकारी ली जा रही है कि एंबुलेंस सेवा कैसी रही।
प्राइवेट वाहन किया फिर भी जान रहे राय
सदर ब्लॉक के महतेपुर निवासी जीवन लाल ने बताया कि उसकी पत्नी के पेट में दर्द होने पर 29 जुलाई को 102 और 108 नंबर को कई बार फोन किया। तीन घंटे इंतजार के बाद भी एंबुलेंस न मिलने पर प्राइवेट गाड़ी कर जिला अस्पताल गए थे। सोमवार को एंबुलेंस कंट्रोल रूम से फोन कर पूछा गया कि सुविधा मिलने के संबंध में आप क्या राय देना चाहते हैं। इस पर उन्होंने फोन काट दिया।
एंबुलेंस सेवा मजाक बनकर रह गई
शहर से सटे बरमूपुर निवासी राहुल सिंह ने बताया कि एक सप्ताह पहले फफूंद रोड पर एक्सीडेंट में युवक घायल हुआ था। अपने मोबाइल से 108 नंबर डायल एंबुलेंस मंगाई थी। मौके पर परिजन घटना के एक घंटे बाद पहुंचे। लेकिन एंबुलेंस नहीं आई। परिजन घायल युवक को जिला अस्पताल ले गए थे। कंट्रोल रूम से कितनी देर में एंबुलेंस पहुंची, ये जानकारी की जा रही थी। एंबुलेंस सेवा मजाक बनकर रह गई है।