फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

औरैयाः मैं तिरंगे के लिए जान भी दे सकती हूं.....

विज्ञापन
कुल हिंद मुशायरा में कलाम पेश करतीं शायरा अना देहलवी - फोटो : AURAIYA
विज्ञापन
औरैया। शरदोत्सव प्रदर्शनी पंडाल में रविवार की रात आयोजित अखिल भारतीय मुशायरा में जाने माने शायरों ने एक से एक बेहतरीन कलाम पेश किया। देर रात चले मुशायरे का श्रोताओं ने खूब लुत्फ उठाया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में एसडीएम अजीतमल राशिद अली खान व पूर्व मंत्री रामजी शुक्ला मौजूद रहे।
विज्ञापन

मुख्य अतिथि एसडीएम राशिद अली खान ने शमां रोशन कर मुशायरा शुरू करने का ऐलान किया। इसके बाद मुशायरे का आगाज अज्म शकिरी की नाते पाक से हुआ। शायर नदीम फार्रुख का शेर ‘जब से मेरे उरूज की उसको खबर मिली, सुनते हैं उसका जहनी तवज्जुन बदल गया’ काफी सराहा गया। हाशिम फिरोजाबादी ने ‘सड़क पर आ गए पर्दा नशीं फरिश्ता भी कमान उनकी खुदा ने संभाल रखी है’ कलाम पेश किया।
इसी कड़ी में हसन प्रतापगढ़ी ने ‘मुल्क पर जान लुटाने की खातिर हम हथेली पर जान रखते हैं’ सुनाकर खूब वाहवाही लूटी। सिकंदर हयात ‘गड़बड़’ ने तंजोमिजा की शायरी की। आदिल भुसावल ने ‘आंख सबसे लड़ाना बुरी बात है, जी हमारा जलाना बुरी बात है’ शेर पढ़ा। जुबेर अली ताबिश ने ‘जिसने आंख अता की है देखने के लिए, उसी को छोड़कर सब कुछ दिखाई देता है’ सूफियाना शेर सुनाकर श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया।
विज्ञापन

देश की जानी मानी शायर अना देहलवी ने ‘मुझे मुल्क से मोहब्बत है इतनी, मैं तिरंगे के लिए जान भी दे सकती हूं’ सुनाकर माहौल को देशभक्ति की ओर मोड़ दिया। शायर अजय अंजाम ने ‘फजाओं में मोहब्बत घोलने लगती है, वो लड़की जब तेरी जुबां को खोलने लगती है, वो लड़की बहुत गुस्से में, वो अवधी में मुझसे बात करती है, मगर खुश होकर उर्दू बोलने लगती है वो लड़की’ सुनाकर खूब वाहवाही लूटी। इस दौरान कार्यक्रम संयोजक सैयद मोहम्मद मियां व शहर काजी कारी आरिफ रहमानी के अलावा छैया त्रिपाठी, पंकज मिश्रा व खुर्रम ताज आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें