औरैया। जिलेभर में सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जों को खाली कराने की कवायद इन दिनों जिला प्रशासन की ओर से की जा रही है।
इस प्रयास से जहां जमीन का फर्जीवाड़ा करने वाले भूमाफियाओं की कमर तोड़ी जा रही है तो वहीं, दूसरी ओर जमीन के अभाव में रुकी पड़ी योजनाओं व सरकारी कार्यालय को खुद की जमीन पर काबिज होने व उनके कार्यालय स्थापित होने का रास्ता भी साफ हो गया है। जिलाधिकारी डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी इसके संकेत दे दिए हैं।
जिलेभर में पिछले एक महीने में काफी जमीनों को खाली कराया गया है। यह सिलसिला अभी लंबा चलने वाला है। बेशकीमती जमीनों पर फर्जी तरीके से काबिज हुए लोगों को अब बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा है। खासतौर पर दिबियापुर के इर्द-गिर्द फोकस है। ककोर मुख्यालय के आसपास सालों से सर्किट हाउस को लेकर जमीन की डिमांड अधूरी पड़ी थी। इसके अलावा पीडब्ल्यूडी को भी सड़क किनारे जमीन की जरूरत है। वहीं, भूमि संरक्षण विभाग, आयकर विभाग, होम्योपैथी विभाग, यूनानी चिकित्सालय व ग्राम पंचायत व न्याय पंचायत स्तर पर लेखपालों के आवास को लेकर सरकारी जमीनें नजर नहीं आ रही थीं। इन कार्यालयों को किराए के भवनों व दूसरे विभागों के भवनों में अभी तक चलाया जा रहा है।
पुरानी कलक्ट्रेट स्थित आबकारी कार्यालय व जिला पूर्ति अधिकारी कार्यालय वर्षों से पुराने जर्जर भवनों में चल रहे हैं। इन्हें खुद की जमीन पर कार्यालय नसीब होने का मौका मिल गया है। सरकारी जमीन की हकीकत सामने आते ही इन्हें खाली कराया जा रहा है। ऐसे में इन सरकारी विभागों को जमीन का आवंटन शुरू कराया जाएगा। बंद पड़ी परियोजनाओं को पूरा करने की दिशा में यह सार्थक पहल होगी। अधिकारी भी इसे ध्यान में रखते हुए जमीनों का खाका तैयार कर रहे हैं। जिन जमीनों पर लोगों ने अवैध कब्जे कर रखे थे, वही जमीनें अब सरकारी महकमे के लिए सहूलियत का सबब बनेंगीं। जमीन की मांग को अब पूरा करने का भी दौर शुरू होगा।
जिन सरकारी जमीनों को कब्जामुक्त कराया जा रहा है, वहां पर सरकारी कार्यालयों को जमीन देकर उनके कार्यालयों को वजूद में लाया जाएगा। कोई भी परियोजना जमीन के अभाव में नहीं रुकेगी। -डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी, जिलाधिकारी