पड़ोसी जनपदों में लोगों की जान का दुश्मन बनते जा
रहे डेंगू के वायरस अटैक से लोगों की जान पर बनी हुई है, लेकिन जिले के
स्वास्थ्य महकमे के चेहरे पर जरा भी शिकन तक नहीं है।
डेंगू रोग से
बेख्याल सीएमओ कार्यालय से तैयारियों के सवाल पर अफसर एक-दूसरे पर
जिम्मेदारी डाल रहे हैं। डेंगू वायरस से निपटने के लिए की गई तैयारियों का
जायजा लिया गया तो स्थिति हालातों के ठीक प्रतिकूल नजर आई। पेश है अमर
उजाला की खास रिपोर्ट
जिले में डेंगू रोग से निपटने की जिम्मेदारी
सीएमओ कार्यालय से जिला मलेरिया विभाग को सौंपी गई है। सीएमओ कार्यालय
परिसर के एक कक्ष में जिला मलेरिया अधिकारी (डीएमओ) कार्यालय संचालित है।
शुक्रवार
को पड़ताल के दौरान जिला मलेरिया अधिकारी कार्यालय पर ताला लटका मिला। पता
किया तो डीएमओ साहब गेल द्वारा निर्मित जिला अस्पताल के रैन बसेरा में
संचालित राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के कार्यालय में मौजूद हैं।
जैसे-तैसे
आमना-सामना होने के बाद जिला मलेरिया अधिकारी से डेंगू रोग से संबंधित
जानकारी लेने को डीएमओ दफ्तर खुलवाया गया तो दफ्तर स्वयं संक्रमण की चपेट
में नजर आया। टेबिल और कुर्सियों को देख ऐसा महसूस हुआ कि जैसे यह दफ्तर आज
काफी दिनों बाद खुला हो।
इसकी पुष्टि भी दफ्तर में लगे कूलर के
स्टार्ट करने पर हवा के साथ निकली धूल ने कर दी। कक्ष के हर कौने में रखा
अव्यवस्थित सामानों के साथ जिले में डेंगू रोग नियंत्रण के इंतजाम भी पूरी
तरह अव्यस्थित नजर आए।
विडंबना ही कहेंगे कि जिले में डेंगू के
नियंत्रण की पड़ताल के दौरान कोई तैयारी नजर नहीं आई और न ही जिला
स्वास्थ्य महकमा इसको लेकर ठोस जवाब दे सका। रोग नियंत्रण को लेकर न तो
जिला स्तर पर कोई स्पेशल डेंगू वार्ड बनाया गया है और न ही इस रोग की
रोकथाम व उपचार को लेकर कोई तैयारियों की शुरुआत तक नजर नहीं आई।
संक्रमण
का रूप लेते जा रहा डेंगू वायरस ाहर से महज 40 किमी. दूर पड़ोसी जनपद
कानपुर देहात में होने की पुष्टि हुई। लापरवाही, इस रोग को जिले में पनपने
की दावत देती नजर आ रही है।