संवाद न्यूज एजेंसी
औरैया। जिस तरह रमजान के दिनों में मुसलमान अपने पैसे और तिजारती माल पर जकात देकर उसे हलाल कमाई बनाते हैं, ठीक उसी तरह रोजे में की गई कोताही को दुरुस्त करने के लिए शरीयत में सभी मुसलमानों पर फितरा वाजिब किया गया है। अधिकतर लोग यही समझते हैं कि फितरा केवल गेहूं के रूप में दिया जाता है, लेकिन ऐसा नहीं है।
फितरे को लेकर मुफ्ती अयूब साहब बताते हैं कि यह हर मुसलमान पर वाजिब है। इसे हदीस में रोजे के दौरान हुई कोताही को सुधारने का जरिया बनाया गया है। अगर आप के पास पैसा है तो आपको गेहूं के आगे बढ़कर जरूरतमंद को फितरा देना चाहिए। मुफ्ती अयूब साहब ने बताया कि ईद से पहले पौने दो किलो गेहूं, साढ़े तीन किलो जौ, साढ़े तीन किलो खजूर, साढ़े तीन किलो किशमिश या साढ़े तीन किलो पनीर फितरे के तौर पर दिया जाना चाहिए। या इसकी कीमत के बराबर पैसा भी अदा किया जा सकता है।