फफूंद (औरैया)। जहां एक ओर सरकार पात्र लोगों को आवास की चाबी दे रही है तो वहीं कुछ लोग ऐसे भी हैं जिनके लिए सालों से ये सपना ही बना हुआ है। विकास खंड भाग्यनगर अंतर्गत ग्राम करही में प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री आवास योजना का लाभ पात्रों को नहीं मिल पाया है। सालों से झोपड़ी में रह रहे लोग आवास पाने के लिए अधिकारियों व ग्राम प्रधान के चक्कर काट रहे हैं। सर्वे के दौरान पात्र पाए गए लोगों का कहना है कि सूची में नाम होने के बाद भी उन्हें भटकना पड़ रहा है। एक अदद छत की दरकार है।
प्रधानमंत्री मोदी ने ग्राम पंचायतों में आवासहीन पात्रों को प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के तहत आवास उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए थे। मुख्यमंत्री आवास योजना भी चल रही है। पात्रों को लाभ दिलाने के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर विकास विभाग द्वारा सर्वे के आधार पर पहली सूची तैयार की गई। आरोप है कि जांच पड़ताल के बाद भी करही गांव के करीब 40 परिवारों को योजना का लाभ नहीं मिल सका। शिवानी, रेशमा देवी, संतोष कुमारी, माधुरी देवी, चंद्रलता समेत कई परिवार खुले में झोपड़ी व पन्नी के सहारे रातें गुजार रहे हैं।
करही निवासी फातिमा बेगम ने बताया कि पांच साल पहले ग्राम प्रधान ने सर्वे के दौरान उन्हें पात्र बताया था। साथ ही जानकारी दी थी कि उनका नाम पात्रता सूची में है, जल्द आवास मिलेगा। आज तक वह अफसरों के चक्कर लगा रही हैं, योजना का लाभ नहीं मिला।
शमा ने बताया कि उनकी माली हालात ठीक नहीं है। किसी तरह वह गुजर बसर कर रही हैं। वह एक ईंट भी नहीं रखवा सकती। आवास न होने के बाद भी प्रशासन से उन्हें आज तक लाभ नहीं मिल सका। सालों से ग्राम प्रधान, सचिव और ब्लाक के चक्कर लगाते थक गईं हैं।
प्रेमा देवी ने बताया कि पांच साल पहले जब प्रधान और सचिव सर्वे करा रहे थे, तब उन्हें आवास की उम्मीद जगी। सरकार की योजना से उन्हें खुशी थी, लेकिन किसी ने उनकी हालत पर ध्यान नहीं दिया। वह पड़ोसी की पक्की दीवार के सहारे झोपड़ी डालकर रह रही हैं।
ग्राम विकास अधिकारी अंशुल मिश्रा ने बताया कि करही में प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री आवास योजना के लिए 40 परिवारों को चिह्नित कर उनकी सूची बना ली है। साइट नहीं चलने से सूची फीड नहीं हो पाई है। साइट खुलते ही सूची फ़ीड करा दी जाएगी ताकि पात्र परिवारों को आवास योजना का लाभ मिल सके।