औरैया। वर्ष 2012 में प्लास्टिक सिटी के निर्माण का खाका अब भी पूरा नहीं हो सका है। ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी में भी खूब उद्यम को बढ़ावा देने की ढोल पीटा गया। इस सब के बीच प्लास्टिक सिटी अब भी अधूरी है। जिले में साइन हुए 239 एमओयू के मुकाबले 114 पूरे भी हो चुके हैं, लेकिन प्लास्टिक सिटी इस सब के बीच निराशा व हताशा का सबब बनी है।
वर्ष 2012 में दिबियापुर के पांच गांवों की 314 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया गया था। 285 एकड़ के 286 भूखंडों में प्लास्टिक (खिलौना, कुर्सी, प्लास्टिक पाइप आदि) से जुड़े उद्योगों की स्थापना होनी थी, जबकि 89 एकड़ के 622 भूखंडों में आवासीय भवन बनना प्रस्तावित है। उद्योग लगाने के लिए कई छोटे बड़े उद्योगपतियों ने आवेदन किए। कई उद्योगपतियों ने भूखंड आवंटन के पश्चात उन पर कब्जा भी ले लिया। 163 स्थानों का आवंटन पिछले दिनों पूरा कर लिया गया है।
प्लास्टिक सिटी परिसर में कई जगह बिजली के तार लापता है। यहां तक कि सड़क जर्जर हैं। हालांकि इस सब के बीच एक स्क्रैप कंपनी की ओर से बिल्डिंग तैयार करने का काम शुरू कराया गया है। जबकि पूरी प्लास्टिक सिटी वीरान पड़ी है। इस पर ध्यान टिकाया जाता तो एक मुश्त कई उद्योग लगते। खाली हाथों को काम भी मिलता। हालांकि इन दिनों काफी हद तक यूपीसीडा की ओर से व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने का काम किया जा रहा है। दावा यह किया जाता है कि 90 प्रतिशत काम पूरा हो गया है, लेकिन इस सब के बावजूद उद्यम धरातल पर नहीं लगाए जा रहे। यूपीसीडा ने हालांकि हाईमास्ट लाइटें लगवाई हैं। जनपद के लोगों महज उम्मीद लगाए बैठाए हैं।
बोले जिम्मेदार
यूपीसीडा व लोक निर्माण विभाग की ओर से संयुक्त रूप से खामियों को दूर कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। खास तौर पर सड़क को लेकर प्रयास किए जा रहे हैं। जिला प्रशासन की ओर से लगातार इसे लेकर गंभीरता से सुध ली जा रही है। स्क्रैप सेंटर का निर्माण जारी है। एक दो अन्य कंपनियों का भी जल्द काम शुरू हो जाएगा।
-अनुराग अग्रहरि, उद्यमी मित्र