थाना बेला क्षेत्र के गांव मंडरिया में विवाहिता की मौत पर दहेज हत्या के तहत दर्ज कराई गई रिपोर्ट में दो आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में अपर सत्र न्यायाधीश ने बरी कर दिया। लेकिन वादी पर मुकदमा के खिलाफ गलत साक्ष्य देने पर सीआरपीसी की धारा 344 के तहत मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया।
मामले में मृतक के भाई राजेंद्र सिंह ने कोर्ट से 156(3) के तहत दहेज हत्या का मामला दर्ज कराया था। उन्होंने आरोप लगाया कि उसकी बहन दर्शनी देवी की शादी 22 अप्रैल 2008 को मंडरिया थाना बेला निवासी सर्वेश कुमार के साथ हुई थी। 28 मई 2012 को जहर से दर्शनी देवी की मौत हो गई। वादी ने पति सर्वेश कुमार, ससुर बनवारीलाल व सास तारा देवी के खिलाफ दहेज हत्या व दहेज हत्या का मामला दर्ज कराया।
यह मुकदमा एडीजे अंगद प्रसाद की कोर्ट में चला। मुकदमे के दौरान ससुर बनवारीलाल की मौत हो गई। इधर आरोपियों का वादी पक्ष से समझौता हो गया। इसमें वादी ने कोर्ट में गवाही के दौरान कहा कि बहन को उसके पति सर्वेश कुमार, ससुर बनवारीलाल व सास तारा देवी ने जहर नहीं दिया। बचाव पक्ष के वकील अरविंद राजपूत व अभियोजन पक्ष को सुनने के बाद कोर्ट ने साक्ष्य के अभाव में सभी आरोपियों को बरी कर दिया। लेकिन कोर्ट में मुकरने व गलत साक्ष्य देने के आधार पर वादी पर मुकदमा दर्ज करा दिया।