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मौसम की मार कर रही लोगों को बीमार

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औरैया। फाल्गुन माह की शुरुआत होते ही आबोहवा भी बदलने लगी है। मौसम के बदलते रुख से मौसमी बीमारियों का हमला भी तेज हो गया है। मौसम की मार से सर्दी, जुकाम, खांसी जैसे सामान्य लक्षणों के साथ सबसे ज्यादा सांस रोगियों की परेशानी बढ़ गई है।
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दिन में तेज धूप (बीच-बीच में बदली) के साथ गर्मी और शाम को गुलाबी ठंड होने से ऐसे मरीजों की तबीयत गड़बड़ा रही है। जिला अस्पताल मेें इस समय 20 से 25 सांस रोग से पीड़ित मरीज प्रतिदिन आ रहे हैं।
मौसम में बदलाव होने का असर अब सेहत पर भी पड़ने लगा है। अच्छी-खासी ठंड के बाद तापमान के इस उतार चढ़ाव के कारण
अस्पताल में मौसमी बीमारियों से पीड़ित मरीजों बढ़ गए हैं। चिकित्सकों के मुताबिक बदलते मौसम में अस्थमा और ब्रोंकाइटिस के रोगियों को ज्यादा परेशानी होती है। इसलिए इन बीमारियों के रोगियों को विशेष सावधानियां बरतनी चाहिए। इन दिनों तापमान एक
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जैसा नहीं होता है, साथ ही पारा बढ़ने-घटने के क्रम में काफी तेजी होती है। धमनियों व रक्त वाहिकाओं में संकुचन और अन्य कारणों से अस्थमा और ब्रोंकाइटिस के रोगियों की दिक्कतें बढ़ जाती हैं। ऐसे मरीजों में सांस फूलने, सांस लेने में दिक्कत, रुक-रुक
कर खांसी समेत अन्य लक्षण उभरने लगते हैं।
ऐसे मरीजों को इन दिनों खानपान को लेकर सावधानी बरतने की जरूरत होती है। इसके साथ ही झटके में गर्म कपड़े पहनना बंद न करें। साथ ही प्रदूषण से भी खुद को बचाकर रखें। प्रदूषण की वजह से भी लोगों को सांस लेने में दिक्कत होती है।
चिकित्सकों के मुताबिक ब्रोंकाइटिस दो तरह की होती है। तीव्र (एक्यूट) व दीर्घकालिक (क्रॉनिक)। एक्यूट ब्रोंकाइटिस धूल, धुआं, वायु प्रदूषण, तंबाकू के सेवन से होती है। यह आम बीमारी है। कीटाणु जनित संक्रमण भी एक कारण हो सकता है। बीमारी के
शुरुआती लक्षणों में जुकाम, नाक बहना, खांसी व सिर में हल्का दर्द शामिल हैं। इसमें करीब एक से डेढ़ हफ्ते में आराम मिलता है। ज्यादा दिनों तक तबीयत गड़बड़ रहने पर डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। किसी व्यक्ति के छींकने व खांसने पर उससे हमेशा दूरी बनाकर रखना चाहिए।
क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस गंभीर बीमारी मानी जाती है। इसका सबसे आम कारण सिगरेट पीना होता है। बीमारी में खांसी समय के साथ बढ़ती है और कई बार तो महीनों तक रह सकती है। बुखार व थकान इसके मुख्य कारण हैं। बुखार यदि 100.4 डिग्री हो और सर्दी
के साथ सीने में दर्द व खांसी होने पर डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। ब्रोंकाइटिस के 20 मामलों में से एक मामला निमोनिया होता है। ऐसा तब होता है जब संक्रमण फेफड़ों में फैलता है।
प्रदूषण से बचाव के लिए नाक और मुंह ढंककर बाहर निकलें। घर से निकलते वक्त मास्क लगाना न भूलें। गर्म कपड़े पहनना एक दम से बंद न करें। तली-भुनी चीजें व बाजार के खाने से परहेज करें। गुनगुने पानी से गरारा जरूर करें और इसके बाद गुनगुना पानी पीएं। ठंडी तासीर वाले खाद्य पदार्थ न लें। धूल व धुएं वाली जगहों में जाने से बचें। डॉक्टरों से संपर्क कर आवश्यक जांच करा दवा लें।
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. अशोक राय ने बताया कि बदलते मौसम की वजह से सांस के मरीजों की संख्या बढ़ी है। खासकर बुजुर्ग मरीज अधिक सामने आ रहे हैं। एक जनवरी से अभी तक हुई जांच में 142 मरीज क्षय व सांस रोग से पीड़ित मिले हैं। ऐसी
स्थिति में पानी पीने से फेफड़ों में मौजूद बलगम पतला होता है। चाय से भी इस स्थिति में आराम मिलता है। फेफड़ों को स्वस्थ रखने के लिए नियमित व्यायाम करें।
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