संवाद न्यूज एजेंसी
औरैया। विवाद, व्यापारी की हत्या की साजिश और कई गंभीर आरोपों में घिरे दिबियापुर थाना प्रभारी रुद्र प्रताप नारायन त्रिपाठी पर आखिरकार गाज गिर ही गई। कानपुर से लेकर लखनऊ तक हुई शिकायतों और डीआईजी की जांच में प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने के बाद एसपी ने उन्हें शनिवार को तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर कर दिया है।
दिबियापुर थाने की कार्यप्रणाली पर सवाल तब उठे जब इसी हफ्ते डीआईजी हरीश चंदर के निरीक्षण के दौरान एक व्यापारी ने सीधे इंस्पेक्टर और उनके सिपाहियों पर अपनी हत्या की साजिश रचने का संगीन आरोप जड़ दिया था। जनसुनवाई में लगे इन आरोपों की प्राथमिक जांच हुई तो लापरवाही की पुष्टि हो गई। इसके बाद यह कार्रवाई की गई।
इंस्पेक्टर त्रिपाठी का कार्यकाल शुरू से ही विवादित रहा। छह माह पूर्व कस्बा के चौराहे पर भाजपा नेता अंकुर तिवारी से अभद्रता करना उन्हें भारी पड़ा था, जिसके बाद समर्थकों ने थाने में ही धरना दे दिया था। स्थिति यह हुई कि इंस्पेक्टर के माफी मांगने के बाद धरना खत्म हो सका था। इसके बाद हद तो तब हो गई जब होटल में किशोरी से दुष्कर्म के मामले में शिकायत लेकर पहुंचे पीड़ित पिता का ही पुलिस ने शांतिभंग में चालान कर दिया। अधिकारी के हस्तक्षेप के बाद ही आरोपियों की गिरफ्तारी हो सकी।
चर्चा है कि थाने के एक हिस्ट्रीशीटर की पहुंच इंस्पेक्टर के कार्यालय से लेकर आवास तक थी। बीते दिनों इंस्पेक्टर के हमराहियों का लेन-देन का मामला कानपुर के उच्चाधिकारियों तक पहुंचा था। इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए दो हमराहियों को लाइन हाजिर और दो को थाने से हटा दिया गया था।
इसके अलावा छेड़छाड़ के आरोपियों को पकड़कर छोड़ने और मिनी गुंडा एक्ट की कार्रवाई पर कोर्ट द्वारा नोटिस दिए जाने से किरकिरी हुई थी। फिलहाल मामला चर्चा में बना हुआ है।