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डायलिसिस यूनिट के लिए जमीन चिन्हित, नपाई का कार्य पूरा

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औरैया। गुर्दों से संबंधित बीमारियों से पीड़ित मरीजों को डायलिसिस के लिए दूसरे शहरों में नहीं जाना पड़ेगा। जल्द यह सुविधा जिला अस्पताल चिचौली में मिल सकेगी। डायलिसिस यूनिट की स्थापना के लिए स्वास्थ्य विभाग ने जमीन चिह्नित कर पैमाइश करा ली है। शासन से बजट मिलने के बाद भवन का निर्माण शुरू कराया जाएगा।
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जनपद में किसी भी अस्पताल में डायलिसिस सुविधा उपलब्ध नहीं है। गंभीर रोगियों को दूसरे शहरों में दौड़ लगानी पड़ती है। मरीजों के समय और रुपये की बर्बादी होती है। शासन ने जिले में डायलिसिस यूनिट की स्थापना की मंजूरी दे दी है। चिचौली स्थित 100 शय्या जिला संयुक्त चिकित्सालय में यूनिट की 57.17 लाख रुपये से स्थापना होगी। जिसकी पहली किस्त 28.86 लाख स्वीकृत कर दी गई है। जल्द ही ग्रांट मिलने की उम्मीद है। यूनिट में 100 बेड की व्यवस्था होगी। मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. अर्चना श्रीवास्तव ने बताया कि डायलिसिस यूनिट की स्थापना के लिए जिला चिकित्सालय चिचौली में जमीन का चिन्हीकरण और पैमाइश करा ली गई है। बर्न यूनिट भवन के बगल में खाली पड़ी जमीन पर बजट आते ही भवन का निर्माण शुरू कराया जाएगा। भवन निर्माण के बाद ही अन्य तैयारियां की जाएंगी।
ऐसे रोगियों को पड़ती है डायलिसिस की जरूरत
डायलिसिस रक्त शोधन की कृत्रिम विधि होती है। डायलिसिस की प्रक्रिया को तब अपनाया जाता है। जब किसी व्यक्ति के गुर्दे सही से काम नहीं कर रहे होते हैं। गुर्दे से जुड़े रोगों, लंबे समय से मधुमेह के रोगी, उच्च रक्तचाप जैसी स्थितियों में कई बार डायलिसिस की आवश्यकता पड़ती है। गंभीर मरीजों को तीसरे और पांचवें दिन डायलिसिस करानी पड़ती है।
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