औरैया। जिले में 28 फरवरी तक धान खरीद होनी है। इस समय 44 में 36 क्रय केंद्र बंद हो चुके हैं। केवल खाद्य विभाग के आठ केंद्रों पर ही खरीद हो रही है। अधिकांश केंद्रों के बंद होने से किसान परेशान हैं। बड़ी संख्या में किसान धान को लेकर केंद्रों के चक्कर काट रहे हैं। जिले में अभी तक लक्ष्या के सापेक्ष 72.22 फीसदी खरीद ही हो सकी है।
जिले में शासन से 65 हजार 400 मीट्रिक टन खरीद का लक्ष्य था, जिसे घटाकर 60 हजार मीट्रिक टन कर दिया गया है। एक नवंबर से धान खरीद चल रही है। अभी तक 43326.68 मीट्रिक टन धान की खरीद हो चुकी है। धान खरीद के लिए कुल 44 केंद्र बनाए गए थे। जिसमें पीसीएफ के 16, पीसीयू के सात, यूपीएसएस के चार, मंडी का एक, एफसीआई का एक, फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी के दो, खाद्य विभाग के 13 थे। जिसमें खाद्य विभाग के आठ केंद्रों को छोड़कर शेष 36 केंद्र धान की आवक कम होने की बात कहकर बंद कर दिए हैं।
शुरूआत में शासन ने पारदर्शिता के लिए ऑनलाइन टोकन की प्रक्रिया शुरू की थी। किसानों को खाद्य व रसद विभाग की वेबसाइट से ऑनलाइन टोकन लेना पड़ रहा था। सुबह दस बजे वेबसाइट खुलते ही ऑनलाइन स्लॉट बुक हो जाते थे। आठ जनवरी से ऑफलाइन खरीद शुरू की गई लेकिन उसके बाद कई दिन मौसम का मिजाज बिगड़ा रहा। धान भीगने से किसान नहीं बेच पाए।
किसानों का कहना है कि केंद्र से टोकन नहीं मिल रहा है, तौल के लिए टरकाया जा रहा है। सदर ब्लॉक के गांव भरसेन के किसान गुुरुबचन ने बताया कि उन्होंने धान क्रय के लिए अपना पंजीकरण कराया। मंडी समिति स्थित खाद्य विभाग के क्रय केंद्र पर कई चक्कर लगाए, लेकिन खरीद नहीं हुई। मजबूरन उन्हें आढ़त पर अपना धान बेचना पड़ा। सदर ब्लॉक के गांव धौरेरा के किसान राकेश पाल ने बताया कि उन्होंने भी अपना पंजीकरण कराया था, लेकिन केंद्र पर उन्हें यह कहकर टरका दिया गया कि उनका धान मानक के अनुरूप नहीं है।
28 फरवरी तक धान खरीद होनी है। किसानों की संख्या कम होने की वजह से 36 केंद्र बंद किए गए हैं। जो केंद्र चालू हैं, वहां लगातार खरीद हो रही है। शासन से लक्ष्य भी घटाकर 65400 मीट्रिक टन से 60 हजार मीट्रिक टन कर दिया गया है। अब तक 43326.68 मीट्रिक टन धान की खरीद हो चुकी है।
- सुधांशु शेखर चौबे, जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी