औरैया। एरवाटीकुर में लगभग साढ़े चार साल पहले पड़ोसी युवक द्वारा छात्रा की हत्या में दोषी को फांसी की सजा सुनाए जाने की जानकारी मिलते ही छात्रा के परिवार ने खुशी जताई। उन्होंने इसे भगवान के घर से मिला न्याय बताया। कहा कि इससे उनके दिल को सुकून तो मिला ही है वहीं न्यायालय के इस आदेश से जघन्य अपराधों की मानसिकता रखने वाले अपराधियों के हौसले पस्त हुए हैं।
जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुशील कुमार ने नाबालिग निशा की हत्या में अजय कुमार पुत्र रामनरेश निवासी ऐरवाटीकुर को फांसी की सजा सुनाई। निशा (14) के पिता भागवताचार्य राम प्रताप अवस्थी ने कोर्ट के इस फैसले को भगवान का फैसला बताया। कहा कि 10 अक्तूबर 2014 को उनकी पुत्री की गोली मारकर की गई हत्या के बाद न्याय पाने को वह बेचैन थे। उन्हें न्याय चार साल पांच माह और 14 दिन में आखिर मिल ही गया। कहा कि भगवान के यहां देर है अंधेर नहीं। उन्होंने इसके लिए न्यायालय का शुक्रिया अदा किया। न्यायालय के आदेश की जानकारी मिलते ही मां शशी प्रभा अवस्थी फिर से यादों में खो गई। बेटी की याद ताजा होते ही आंखों से आंसू झरने लगे। भरे गले से बोलीं, आज उनकी बेटी की आत्मा को भी शांति मिल गई होगी। परिवार के लोगों ने न्यायालय के इस आदेश को जघन्य आरोपों में संलिप्त अपराधियों के हौसले पस्त होना बताया। शशी प्रभा ने बताया कि उनके परिवार में दो छोटे पुत्र रिषी व रिशू अवस्थी के अलावा दो छोटी पुत्रियां शिखा व अंशिका हैं। हालांकि जानकारी करने पहुंचने के दौरान मौके पर दोनों पुत्रियां नहीं मिलीं। बताया कि वे रिश्तेदारी में गई हुई हैं। वहीं कसबे के लोगों ने भी अजय कुमार को फांसी की सजा को न्याय की जीत बताया।