फोटो-28एयूआरपी17- उदयागामी सूर्य को अर्घ्य देतीं महिलाएं। संवाद
दिबियापुर। चार दिवसीय छठ महापर्व का समापन मंगलवार सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य अर्पित करने के साथ हुआ। औरैया जिले के विभिन्न इलाकों में व्रती महिलाओं ने बड़ी श्रद्धा और भक्ति भाव से सूर्यदेव को जल चढ़ाया और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। जैसे ही पूर्व दिशा में सूरज की लालिमा दिखाई दी, वैसे ही घाटों पर छठी मइया के जयकारे गूंज उठे और वातावरण भक्तिमय हो गया।
सोमवार शाम डूबते सूर्य को पहला अर्घ्य देने के बाद व्रती रातभर गीतों और भजन की धुनों में लीन रहीं। मंगलवार की भोर में महिलाओं ने दोबारा घाटों का रुख किया। गैल, दिबियापुर, अजीतमल, बिधूना, अयाना और औरैया नगर के घाटों पर हजारों श्रद्धालु एकत्र हुए। परिजनों ने पानी में खड़े होकर उगते सूर्य को दूध, जल और गन्ने के साथ अर्घ्य दिया। पूजा के बाद व्रती महिलाओं ने प्रसाद ग्रहण कर 36 घंटे का निर्जला व्रत पूरा किया। नगर निकायों और जिला प्रशासन की ओर से घाटों पर साफ-सफाई, रोशनी और सुरक्षा की व्यापक व्यवस्था की गई थी।
पुलिस बल ने सुबह तक ड्यूटी निभाई ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। पूरे जिले में छठ पूजा की पवित्रता और अनुशासन का दृश्य देखते ही बनता था। श्रद्धालुओं ने कहा कि छठ मइया का यह पर्व लोक आस्था का सबसे बड़ा प्रतीक है। इसमें परिवार की सुख-शांति और समृद्धि के लिए सूर्यदेव की आराधना की जाती है। पूजा के समापन के साथ ही लोगों ने एक-दूसरे को छठ की शुभकामनाएं दीं और घरों में प्रसाद का वितरण किया।
फोटो-28एयूआरपी17- उदयागामी सूर्य को अर्घ्य देतीं महिलाएं। संवाद
फोटो-28एयूआरपी17- उदयागामी सूर्य को अर्घ्य देतीं महिलाएं। संवाद