औरैया। मेडिकल कॉलेज चिचौली में जल्द ऑटोमेटेड ब्लड कल्चर सिस्टम शुरू हो जाएगा। इससे खून में संक्रमण व बैक्टीरिया का पता आसानी से लग जाएगा। यही नहीं बैक्टीरिया पर कौन सी एंटीबायोटिक्स काम करेगी, इसकी भी जानकारी डॉक्टरों को रिपोर्ट से हो जाएगी। ऐसे में डॉक्टर संबंधित मरीज का सही और सार्थक उपचार कर सकेंगे। इस जांच को फिलहाल पायलट प्रोजेक्ट के तहत शुरू किया गया है। अगले माह से इसे मरीजों के लिए शुरू कर दिया जाएगा।
शहर व ग्रामीण इलाकों के अलावा सटे आसपास के जनपदों एवं प्रांत से विभिन्न बीमारियों के उपचार के लिए मरीज चिचौली मेडिकल कॉलेज आ रहे हैं। मेडिकल कॉलेज के सीएमएस डॉ. पवन कुमार शर्मा ने बताया कि वर्तमान समय में ओपीडी में रोजाना की ओपीडी दो हजार के पार जा रही है। वहीं इमरजेंसी में भी मरीजों की अच्छी खासी संख्या हो रही है। विभिन्न बीमारियों की जांच के लिए 700 से 800 मरीज पंजीकृत हो रहे हैं। ऐसे में विभिन्न बीमारियों की बेहतर जांच के लिए अत्याधुनिक जांच मशीनों से सेंट्रल लैब को लैस किया जा रहा है। अब इस कड़ी में ऑटोमेटेड ब्लड कल्चर सिस्टम से जांच करने की सुविधा शुरू की जाएगी। इसकी रिपोर्ट से डॉक्टर को उस कारण का पता चल सकेगा कि खून में किस बैक्टीरिया के चलते संक्रमण है और कौन सी एंटीबायोटिक्स अथवा दवा काम करेगी। कई मरीजों में ऐसा देखा जाता है कि उन्हें बुखार आ रहा है, लेकिन दवा काम नहीं कर रही है। ऐसी स्थिति में कल्चर जांच की रिपोर्ट का लाभ मरीजों को मिल सकेगा।
इन्फेक्शन वाले मरीजों के उपचार में मिलेगी सहूलियत
जिले में अभी तक ब्लड कल्चर जांच की सुविधा नहीं है। ऐसे में एलर्जी व इन्फेक्शन से जुड़ी समस्या से ग्रसित मरीजों को उपचार के लिए कानपुर की दौड़ लगानी पड़ती है। अब मेडिकल कॉलेज में यह सुविधा होने के बाद मरीजों को आसानी होगी। कानपुर व इटावा की भागदौड़ कम हो जाएगी। डॉक्टर भी मरीज के शरीर में हो रही आंतरिक विकृति को पता करते हुए मरीजों का उपचार कर सकेंगे।