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मुख्यमंत्री के लोकार्पण के बाद नेत्र चिकित्सालय और मातृ शिशु अस्पताल बने शोपीस

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फोटो-28एयूआरपी-01- बन कर तैयार खड़ा मातृ एवं शिशु अस्पताल। संवाद - फोटो : AURAIYA
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बिधूना। प्रदेश सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए तमाम जतन कर रही है, लेकिन अफसरों की अनदेखी से जरूरतमंदों को स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
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हालात ये हैं कि करोड़ों की लागत से जिले में नेत्र चिकित्सालय और मातृ शिशु अस्पताल के भवन तो बनकर तैयार हो गए, लेकिन यहां स्टाफ और व्यवस्थाएं सुनिश्चित नहीं हो सकी। ऐसे में करोड़ों खर्च के बाद भी नतीजा सिफर और मरीजों को इलाज के लिए भटकना मजबूरी बना है।
बिधूना में लगभग सात करोड़ की लागत से 50 शैया नेत्र चिकित्सालय और पांच करोड़ 50 लाख से मातृ शिशु अस्पताल बनकर तैयार हो गया।
इनका अस्पतालों के संचालन के लिए आवश्यक चिकित्सकों और स्टाफ के साथ ही संसाधनों का प्रबंध किए बिना ही स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ के हाथों अस्पताल भवनों का लोकार्पण चार नवंबर 2021 को करा दिया।
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स्थानीय स्तर पर इन अस्पतालों में ओपीडी संचालन की व्यवस्था करने का प्रयास किया गया लेकिन जिस चिकित्सक को जिम्मेदारी सौंपी गई। वह भी लापरवाही से काम कर रहे हैं। ऐसे में जिले के नेत्र मरीजों को अपनी आंख का इलाज कराने के लिए आज भी इटावा, कन्नौज, कानपुर, लखनऊ शहरों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
विभाग नहीं उठा रहा ठोस कदम
बिधूना के दिनेश सिंह कुशवाहा ने बताया कि नेत्र चिकित्सालय और मातृ शिशु अस्पताल के संचालित होने से हर किसी को फायदा है। इसके बाद भी जिले का स्वास्थ्य विभाग कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा है। मुख्यमंत्री को अस्पताल भवनों का लोकार्पण किए छह माह बीत गए। इसके बाद भी अस्पताल शोपीस बन कर खड़े हैं।
जमीनी स्तर पर सुविधाएं नहीं
बिधूना निवासी धीरेंद्र सिंह बताते हैं कि नेत्र चिकित्सालय बने महीनों गुजर गए, लेकिन संचालन आज तक शुरू नहीं हो सका है। अस्पताल शुरू हो जाए तो बीमार लोगों को इलाज के लिए गैर जनपद न जाना पड़े। सरकार के करोड़ों खर्च होने के बाद भी जमीनी स्तर पर सुविधाएं मुहैया नहीं हो पा रही है।
नेत्र चिकित्सक एक कोर्स के लिए अवकाश पर हैं। इसलिए नेत्र चिकित्सालय की ओपीडी शुरू नहीं हो सकी है। जल्द ही ओपीडी चालू कराने के लिए नेत्र परीक्षण अधिकारी व एक अन्य चिकित्सक की तैनाती की जाएगी। मातृ शिशु अस्पताल में बिजली को लेकर समस्या है, जिसके लिए जनरेटर रूम बनवाया जा रहा है। मार्च के अंत में दोनों अस्पताल का संचालन बेहतर ढंग से होगा। - डॉ.अर्चना श्रीवास्तव, सीएमओ

फोटो-28एयूआरपी-02- बिधूना में बना 50 शैया नेत्र चिकित्सालय। संवाद- फोटो : AURAIYA

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