औरैया। कोरोना संक्रमण की दो लहरों में तबाही का मंजर देखने वाले लोग आज भी सिहर उठते हैं। कई लोग तो इस वक्त अपने घरों और दोस्तों से भी दूर हैं। अकेले ही हालात से निपट रहे हैं और अनिश्चित भविष्य के बारे में सोचकर चिंतित है। लोगों में तीसरी लहर आने का डर भी है। कोरोना के बदले स्वरूप ओमिक्रॉन ने मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। बावजूद इसके लोग लापरवाह है। विशेषज्ञ चिकित्सक भी आने वाले दिनों में हालात बेकाबू होने की बात कह रहे हैं।
कोविड-19 की पहली और दूसरी लहर के बीच जिले में 192 लोग अपनी जिंदगी की जंग हार गए। जबकि 10,215 संक्रमित होकर जिंदगी और मौत का सामना कर ठीक हुए। इतना ही नहीं कोरोना की दोनों लहर में लोग ऑक्सीजन की कमी और इलाज के लिए जूझते रहे। जो ठीक हुए उन्हें भी संक्रमण पूरे उम्र के लिए कई बीमारियां दे गया। लोग तबाही का मंजर देखते रहे और चाह कर भी कुछ नहीं कर पाए। ऐसी स्थिति में अपने भी बेगाने से नजर आने लगे थे। जिन्होंने कोरोना की जंग जीती उन्हें अभी भी खांसी, सांस फूलना, जकड़न, कमजोरी व मानसिक तनाव की समस्याएं हैं।
तीसरी लहर और कोरोना के बदले स्वरूप ओमिक्रॉन को लेकर आगाह किया जा रहा है तो लोग बेपरवाह नजर आ रहे हैं। विशेषज्ञ चिकित्सक कह रहे है कि कोरोना के बदले स्वरूप में विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। खास कर बच्चों और बुजुर्गों को बचने की जरूरत है। चिकित्सकों ने आगाह किया है कि लापरवाही इसी तरह रही तो हालात बेकाबू होते देर नहीं लगेगी।
कोरोना से उबरे लोगों की सलाह
शिक्षक गौरव अग्निहोत्री बताते हैं कि उन्हें कोरोना संक्रमण हुआ तो तमाम परेशानियां बढ़ गई थीं। संक्रमण से ठीक होने की चिंता थी। बेहतर ढंग से बचाव करने के साथ ही उपचार चला, जिससे वह जंग जीत गए। कुछ दिन तक सिरदर्द, रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने की वजह से थकान की समस्या रही। अभी भी ज्यादा काम करने पर थकान महसूस होती है। ओमिक्रॉन के बदले स्वरूप को लेकर अभी चिंता है, इसको लेकर वह पूरी तरह से सावधानी बरत रहे हैं और लोगों को बचाव की सलाह भी देते हैं।
कोरोना संक्रमित होकर भी जंग जीतने वाले सुधाकर पाल बताते हैं कि कोरोना काल में ऐसी भयावह स्थिति देखी जिसे देख आज भी सिहर उठते हैं। इसके बाद भी लोग लापरवाही बरत रहे हैं। आने वाले दिनों में यह भारी पड़ सकती है। उन्होंने बताया कि जब कोरोना हुआ तो तमाम परेशानियां हुईं, लेकिन बचाव और उपाय अपनाकर जंग जीत ली। कुछ समस्याएं हैं, जिसको लेकर अभी भी दवा व सावधानी बरत रहे हैं।
डॉक्टर बोले
कोरोना की पहली और दूसरी लहर में संक्रमित हुए लोग आज भी परेशानियां उठा रहे हैं। किसी में खांसी, कमजोरी तो किसी में घबराहट जैसी समस्या बनी हुई है। इस तरह के मरीज शुरुआत के दिनों में ज्यादा आ रहे थे। हालांकि अब लोग कम आ रहे हैं। जो लोग संक्रमित हुए उन्हें विशेष सावधानी बरतनी होगी। इसके साथ ही तीसरी लहर और ओमिक्रॉन को लेकर बच्चों और बुजुर्गों को एहतियात बरतने की जरूरत है। भीड़भाड़ में जाने से बचे, मास्क लगाएं, सामाजिक दूरी का पालन करें। कोविड नियमों का पालन ही संक्रमण का बचाव है।
-डॉ. विशाल अग्निहोत्री, वरिष्ठ परामर्शदाता
स्ट्रेस बढ़ने का शरीर पर असर
डॉ. शिशिर पुरी बताते हैं कि इन स्थितियों का असर ये होता है कि स्ट्रेस बढ़ने लगता है। सामान्य स्ट्रेस तो हमारे लिए अच्छा होता है। लेकिन ज्यादा स्ट्रेस, संकट बन जाता है। ये तब होता है जब हमें आगे कोई रास्ता नहीं दिखता। घबराहट होती है, ऊर्जाहीन महसूस होता है। फिलहाल महामारी को लेकर इतनी अनिश्चितता और उलझन है कि कब तक सब ठीक होगा, पता नहीं। ऐसे में सभी के तनाव में आने का खतरा बना हुआ है, लोगों को विशेष सावधानी के साथ कोविड नियमों का पालन करना होगा।