औरैया। अगर आप यह सोचकर 50 शैया अस्पताल आ रहे हैं कि यहां आपकी बीमारी की दवाएं मुफ्त में मिल जाएंगी। आपको बाहर से दवा नहीं खरीदनी पड़ेगी।
तो यह विचार अपने मन से आप निकाल दें। क्योंकि अस्पताल में आने वाले मरीजों को चिकित्सक अच्छे इलाज के नाम पर निजी कंपनियों की दवाएं लिख रहे हैं। उन्हें यह भी बता रहे हैं कि यह दवा किस मेडिकल स्टोर पर मिलेगी।
सरकार भले ही आम लोगों को मुफ्त इलाज उपलब्ध कराने की दम भरती है लेकिन सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था देख कर इस दम का ही दम निकल जाता है।
हालात ये हैं कि 50 शैया अस्पताल की ओपीडी में आए मरीजों को यहां के डॉक्टर अधिकतर दवाएं बाहर की लिख रहे हैं। साथ ही यह भी बताते है कि आपके मर्ज की दवा किस मेडिकल स्टोर में मिलेगी।
पड़ताल में यह बात उजागर हुई। मंगलवार को 450 से अधिक पर्चे ओपीडी में बने। मरीज अपने पर्चे लेकर ओपीडी में बैठे मर्ज से संबंधित डॉक्टरों के पास गए। डॉक्टरों ने कुछ दवाएं तो अंदर की लिखी।
जबकि अधिकांश दवाएं बाहर की लिख दी। हद इस बात की है कि ओपीडी के समय में डॉक्टरों को मरीजों को देखने में समय लगाना चाहिए। वह निजी दवा कंपनियों के एमआर से बात करने में लगाते हैं। उच्चाधिकारी भी सब कुछ जानते हुए खमोश बैठे हुए है।
उपयोगहीन बना जन औषधि केंद्र
जेनेरिक और सस्ती दवाएं मरीजों को मिल सके। इसके लिए अस्पताल परिसर में जन औषधि केंद्र बना हुआ है। लेकिन यहां मरीज दवा लेने नहीं जाते हैं। क्योंकि मरीजों को दवा मिलने का जो पता डॉक्टर बताते हैं। वहीं पर मरीज और उनके तीमारदार दवा लेने पहुंचते हैं। ऐसे में यह जन औषधि केंद्र उपयोगहीन साबित हो रहा है।
करमपुर की रमाकांति ने बताया कि वह आंख दिखाने आई थीं। डॉक्टर ने चार दवाएं लिखी। इनमें से सिर्फ एक दवा ही जन औषधि केंद्र पर मिली, बाकी बाहर मेडिकल स्टोर में मिली। ऐसे में सरकारी अस्पताल का क्या फायदा, जहां दवा बाहर से खरीदनी पड़े।
जलोखर के मनोज ने बताया कि तीन साल की बेटी साक्षी को कुत्ते ने काट लिया था। मंगलवार को अस्पताल में एंटी रेबीज इंजेक्शन लगवाने के लिए आए थेे। मगर, यहां पर डिस्पोजल (सिरिंज) नहीं थी, जो बाहर से खरीद कर लानी पड़ी।
गुमटी मोहल्ला निवासी मीरा देवी ने बताया कि उनकी आंख में समस्या होने पर 50 शैया अस्पताल में दिखाने आई थीं। अस्पताल में दवा नहीं होने पर डॉक्टर ने खुद बोला कि अम्मा ये दवाएं बाहर मेडिकल स्टोर में मिलेगी। वहां से ले लो।
अगर कोई डॉक्टर बाहर की दवाएं लिखता है, तो उसे चेतावनी दी जाएगी। अस्पताल में सभी दवाएं उपलब्ध है। एमआर को ओपीडी के समय आने की मनाही है। इसके बाद भी कोई परिसर में मिलता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. राजेश मोहन गुप्ता, सीएमएस 50 शैया अस्पताल
फोटो-08एयूआरपी-13 ओपीडी के समय डॉक्टर के कक्ष से बाहर निकलता एमआर । संवाद- फोटो : AURAIYA
फोटो-08एयूआरपी-14 डॉक्टर द्वारा पर्चे में लिखी चार दवाओं के नाम दिखाती रमाकांति। संवाद- फोटो : AURAIYA
फोटो-08एयूआरपी-15 बाहर से डिस्पोजल (सिरिंज) लाकर दिखाते मनोज। संवाद- फोटो : AURAIYA