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Auraiya News: 19 साल पुराने लूट और मारपीट के मामले में पांचों आरोपी दोषमुक्त

Sat, 11 Jul 2026 12:02 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
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औरैया। फफूंद थाना क्षेत्र के गांव बरौआ में वर्ष 2007 में दर्ज कराए गए लूट और मारपीट के एक मामले में विशेष न्यायालय ने फैसला सुना दिया है।
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साक्ष्यों के अभाव और अभियोजन पक्ष के गवाहों के मुकर जाने के कारण, विशेष न्यायाधीश ने सभी पांचों आरोपियों को दोषमुक्त करार दिया है।
परिवादिनी रामबेटी ने साल 2007 में न्यायालय में परिवाद दायर कर गोरेलाल, जयचंद्र, छविराम, नंदकिशोर, छैल बिहारी और अवध बिहारी पर आरोप लगाया था। परिवादिनी का आरोप था कि 25 मई 2007 को आरोपियों ने उसके घर में जबरन घुसकर मारपीट की, सोने के बाले और नकदी लूट ली तथा उसकी भाभी रामादेवी के साथ अभद्रता की। मामले के विचारण के दौरान आरोपी अवध बिहारी की मृत्यु हो गई थी। बृहस्पतिवार को इस मामले की सुनवाई की गई।
न्यायालय में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए सभी मुख्य गवाह परिवादिनी रामबेटी, रामादेवी, जगदीश कुमार, कृष्ण कुमार और ज्योति अपने बयानों से मुकर गए। गवाहों ने न्यायालय को बताया कि उन्होंने घटना के समय आरोपियों को नहीं देखा था और आरोपियों के नाम उन्होंने गांव वालों के कहने पर लिखवाए थे।
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न्यायाधीश महेश कुमार ने पाया कि अभियोजन पक्ष अपने आरोपों को साबित करने में पूरी तरह विफल रहा है। बाद में सभी आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया। (संवाद)
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96 किलो गांजे के साथ पकड़े गए तीन तस्करों पर आरोप तय
औरैया। बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे पर पिछले साल 96 किलो से अधिक गांजे के साथ गिरफ्तार किए गए तीन आरोपियों के खिलाफ बृहस्पतिवार को विशेष एनडीपीएस कोर्ट में आरोप तय कर दिए गए। अदालत ने मामले में सुनवाई की अगली तारीख 23 सितंबर 2026 निर्धारित की है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार 22 जून 2025 को कोतवाली पुलिस ने बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे पर इटावा की ओर जाने वाले रास्ते पर घेराबंदी की थी। इस दौरान डीसीएम ट्रक की तलाशी ली गई, जिसमें आठ बोरियों में 96.870 किलोग्राम गांजा बरामद हुआ। पुलिस ने मौके से वेद सिंह, मिसपेंद्र और शिवदत्त को गिरफ्तार किया था।
आरोप है कि यह खेप बेचने के लिए ले जाई जा रही थी, जिसके लिए आरोपियों के पास कोई वैध लाइसेंस नहीं था। एनडीपीएस एक्ट के विशेष न्यायाधीश/अपर सत्र न्यायाधीश-प्रथम पारुल जैन की अदालत में मामले की सुनवाई हुई। अदालत ने आरोप पढ़कर सुनाए तो तीनों आरोपियों ने अपना जुर्म स्वीकार करने से इन्कार कर दिया और निष्पक्ष विचारण की मांग की। (संवाद)
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दुष्कर्म के आरोपी को मिली जमानत
औरैया। सहायल थाना क्षेत्र से जुड़े अपहरण और सामूहिक दुष्कर्म के एक मामले में विशेष न्यायालय ने आरोपी को जमानत दे दी है। न्यायालय ने अभियुक्त को डेढ़ लाख रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही धनराशि के दो जमानतगीर पेश करने के शर्त पर रिहा करने का आदेश दिया है।
सहायल थाना क्षेत्र के ग्राम गोपालपुर निवासी ध्रुव सिंह के खिलाफ वर्ष 2017 में सामूहिक दुष्कर्म व अपहरण के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया था। यह मामला विशेष न्यायालय में विचाराधीन है। सुनवाई के दौरान अभियुक्त ध्रुव सिंह न्यायालय में उपस्थित नहीं हुआ था, जिसके चलते अदालत ने उसके खिलाफ गैर-जमानतीय वारंट जारी कर दिया था।
इसके बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर 29 जून 2026 को जिला जेल भेज दिया था। आरोपी की ओर से दाखिल दूसरी जमानत प्रार्थना पत्र पर सुनवाई करते हुए विशेष न्यायाधीश विकास गोस्वामी ने उसको जमानत पर रिहा करने का आदेश पारित किया। (संवाद)

दुष्कर्म के आरोपी की जमानत अर्जी खारिज
औरैया। अजीतमल कोतवाली क्षेत्र में किशोरी का अपहरण कर दुष्कर्म करने के आरोपी की जमानत याचिका न्यायालय ने खारिज कर दी। बृहस्पतिवार को सुनवाई करते हुए विशेष न्यायाधीश अखिलेश्वर प्रसाद मिश्र की अदालत ने आरोपी को जेल भेजने का आदेश दिया है।
अजीतमल क्षेत्र के एक ईंट-भट्टे पर काम करने वाली महिला ने पुलिस को दी तहरीर में आरोप लगाया था कि 26 जून 2025 की शाम को फतेहपुर निवासी मोवीन उसकी 13 वर्षीय बेटी का अपहरण कर ले गया। मां के अनुसार, आरोपी ने बेटी के साथ दुष्कर्म किया। दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद न्यायाधीश अखिलेश्वर प्रसाद मिश्र ने मोवीन की जमानत अर्जी खारिज कर दी। (संवाद)
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जानलेवा हमले के दो आरोपियों को अग्रिम जमानत
औरैया। थाना फफूंद क्षेत्र के वर्ष 2020 में दर्ज मारपीट व जानलेवा हमले के एक मामले में सत्र न्यायालय ने दो आरोपियों को अग्रिम जमानत दे दी है। प्रभारी सत्र न्यायाधीश पारुल जैन की अदालत ने मामले के तथ्यों और परिस्थितियों पर विचार करते हुए अभियुक्तों को सशर्त राहत दी है। मामला 3 सितंबर 2020 की रात का है।
आरोप है कि मामूली कहासुनी के बाद दुरदर्शकपुर निवासी धीरेंद्र उर्फ शैलेंद्र और रामनरेश उर्फ रोशनलाल समेत अन्य लोगों ने लाठी-डंडे, सरिया व कुल्हाड़ी से पीड़ित पर जानलेवा हमला किया था। बृहस्पतिवार को सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों को सुनने के बाद न्यायाधीश पारुल जैन ने उन्हें अग्रिम जमानत दे दी। अदालत ने आरोपियों को 50-50 हजार रुपये के व्यक्तिगत बंधपत्र और इतनी ही धनराशि की जमानतगीर पेश करने के आदेश दिए। (संवाद)
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चोरी की बाइक बरामदगी के मामले में दो आरोपी बरी
औरैया। थाना अछल्दा क्षेत्र में सात साल पहले चोरी की बाइक के साथ पकड़े गए दो आरोपियों को जिला एवं सत्र न्यायालय ने साक्ष्यों के अभाव में दोषमुक्त कर दिया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कैलाश कुमार की अदालत ने मामले की सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया। अभियोजन के अनुसार, 11 अगस्त 2019 को अछल्दा पुलिस ने नहर पुल पर वाहन चेकिंग के दौरान एक बाइक पर सवार तीन युवकों को रोकने का प्रयास किया था।
पुलिस का दावा था कि घेराबंदी कर हर्षित सिंह को मौके से गिरफ्तार कर लिया गया, जबकि उसके दो साथी शिवा उर्फ घाडू और भूपेंद्र भागने में सफल रहे। पुलिस के अनुसार, बरामद बाइक चोरी की थी और आरोपी उसे बेचने जा रहे थे। दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद अदालत ने कहा कि जिस बाइक को चोरी का बताया गया, उसे न्यायालय के समक्ष साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत ही नहीं किया गया।
विवेचना में पुलिस यह पता लगाने में नाकाम रही कि बाइक का वास्तविक स्वामी कौन है और बाइक कब व कहां से चोरी हुई थी। बाद में आरोपी हर्षित सिंह और भूपेंद्र को दोषमुक्त करते हुए इटावा जेल से रिहा करने के आदेश दिए हैं। (संवाद)
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महावीर हत्याकांड में साक्ष्य के अभाव में दो आरोपी बरी
औरैया। अजीतमल कोतवाली क्षेत्र में वर्ष 2009 में चर्चित रहे महावीर हत्याकांड मामले में अपर सत्र न्यायाधीश-प्रथम पारुल जैन की अदालत ने बृहस्पतिवार को फैसला सुनाया है। अदालत ने पर्याप्त साक्ष्य और गवाहों के पक्षद्रोही होने के चलते अभियुक्त पप्पू उर्फ वीर सिंह और निर्भय सिंह को दोषमुक्त कर दिया है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, 28 जनवरी 2009 की शाम गांव जाजपुर निवासी महावीर सिंह की खेत पर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। वादी देवेंद्र सिंह ने तहरीर में बताया था कि उनका भाई महावीर सिंह खेत पर गया था, तभी भान सिंह वहां पहुंचा और पुलिस मुखबिरी का आरोप लगाते हुए महावीर पर कट्टे से फायर कर दिए, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
मुख्य आरोपी भान सिंह की मृत्यु के कारण उसके खिलाफ कार्रवाई पहले ही उपशमित हो चुकी थी। पुलिस ने दावा किया था कि जेल में निरुद्ध अभियुक्त पप्पू उर्फ वीर सिंह की निशानदेही पर सिकरौड़ी के जंगल से हत्या में प्रयुक्त तमंचा और कारतूस बरामद किए गए थे। अपर सत्र न्यायाधीश पारुल जैन ने साक्ष्यों में भारी विरोधाभास और चश्मदीद गवाहों के मुकर जाने के कारण अभियुक्त पप्पू उर्फ वीर सिंह और निर्भय सिंह को दोषमुक्त किया जाता है। (संवाद)

साक्ष्य के अभाव में चार आरोपी बरी
औरैया। बिधूना कोतवाली क्षेत्र में करीब आठ साल पहले हुई बारात में मारपीट और एससी/एसटी एक्ट के एक चर्चित मामले में विशेष न्यायालय ने फैसला सुनाया है।
अदालत ने पर्याप्त साक्ष्य न मिलने और गवाहों के मुकर जाने के कारण सभी चार आरोपियों को दोषमुक्त करार दिया है। वहीं, अदालत में झूठ बोलने के आरोप में वादी मुकदमा के खिलाफ ही अलग से कार्रवाई करने का आदेश दिया है।
मामला 6 मई 2017 का है। वादी पप्पू ने बिधूना थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसकी पुत्री की बारात नगला गुलाल गांव आई थी। आरोप था कि मोनू यादव, पवन यादव, बबलू यादव और विजय ने बरात को गांव में घुमाने के लिए कहा। मना करने पर आरोपियों ने जातिसूचक गालियां दीं, मारपीट की और जान से मारने की धमकी दी। इस घटना में बरातियों को चोटें आई थीं। इसी आधार पर पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर चार्जशीट दाखिल की थी।
विशेष न्यायाधीश विकास गोस्वामी की अदालत में सुनवाई के दौरान मामला तब पलट गया, जब वादी पप्पू समेत घटना के अन्य प्रमुख गवाह और चुटहिल (घायल) मुकर गए। कोर्ट ने साक्ष्यों के अभाव में अदालत ने मोनू, पवन, बबलू और विजय को सभी आरोपों से दोषमुक्त कर दिया।
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अदालत ने वादी पप्पू के खिलाफ वाद दर्ज करने और नोटिस जारी करने का आदेश दिया है, क्योंकि उसने अदालत में शपथ लेने के बावजूद विरोधाभासी और मिथ्या बयान दिए। इसके अलावा कोर्ट ने वादी को एससी-एसटी एक्ट के तहत आर्थिक सहायता की वसूली करने के निर्देश दिए। (संवाद)
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