औरैया। इंदौर में दूषित पानी पीने से हुई मौतों के बाद जिले में अलर्ट और विशेष जांच अभियान शुरू हुए। वहीं, अब फिर से लापरवाही होने लगी है। कागजों में सब कुछ साफ-सुथरा है, लेकिन हकीकत में शहर की पानी की टंकियां गंदी ही हैं।
टंकी में सिर्फ क्लोरीन डालकर कागजों में सफाई की जा रही। जबकि टंकियों के अंदर की हालत देखने की जहमत तक कोई नहीं उठा रहा।
नगर पालिका के रिकॉर्ड ही इस लापरवाही की गवाही दे रहे हैं। पिछली बार टंकियों की सफाई कब कराई गई, इसका कोई स्पष्ट उल्लेख तक नहीं किया गया। तर्क था कि लिखवाना भूल गए। इस बार भी नगर पालिका परिसर में बनी टंकी में केवल क्लोरीन पाउडर डालकर खानापूर्ति कर दी गई और रजिस्टर में सफाई की तारीख 10 जनवरी 2026 दर्ज कर दी गई।
जबकि हकीकत यह है कि बेशक क्लोरीन डालने से टंकी के भीतर गंदगी साफ होगी या कीड़े मरेंगे, लेकिन टंकियों की अच्छी तरह सफाई न होने से यह गंदगी टंकी में ही बनी रहेगी। गंदगी के अवशेष पानी के साथ मिक्स होकर ही बाहर निकलेंगे। उधर, इस लापरवाही के पीछे अधिकारियों का कहना है कि ठंड में कोई भी कर्मचारी टंकी में उतरकर सफाई करने को तैयार नहीं होता।
ऐसे में शहर में 10 टंकियों से सप्लाई होने वाला पानी इसी हाल में हजारों घरों तक पहुंच रहा है। पेट की बीमारियां, उल्टी-दस्त और त्वचा रोग के बढ़ते मामले इसी गंदे पानी की ओर इशारा कर रहे हैं। फिलहाल अब नगर पालिका टेंडर कराकर सफाई कराने की बात कह रही है।
टंकियों के पानी का लिया सैंपल, छिपा लीं कमियां
नगर पालिका की क्रियाशील 10 टंकियों से डायरेक्ट पानी का सैंपल लेकर प्रयोगशाला में जांच को भेज दिया। हकीकत यह है कि जगह-जगह पानी की पाइप लाइनें टूटी पड़ी हैं, इससे टंकियों से आने वाला पानी गंदगी के साथ मिलकर घरों तक पहुंचता है। यदि सैंपल घराें में आ रहे पानी के लिए जाते तो जांच में कुछ और स्थिति बन सकती थी।
टंकियों में क्लोरीन पाउडर डालकर सफाई की गई है। कहीं सिल्ट भी हटवाया है। टेंडर तैयार कराया जा रहा है। जल्द ही टेंडर प्रक्रिया पूरी कर सभी टंकियों की पूरी तरह सफाई कराई जाएगी।
- विपिन कुमार, अवर अभियंता, जलकल विभाग, नगर पालिका