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कोरोना काल में करोड़ों खेल, अब फर्मों पर कसेगा नकेल

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औरैया। जिला अस्पताल चिचौली में कोरोना काल में करोड़ों के वारे-न्यारे हो गए। तत्कालीन सीएमएस और ब्लाक प्रोजेक्ट मैनेजर (बीपीएम) ने मिलकर कई फर्जी फर्मों को करोड़ों का भुगतान कर दिया। जांच में मामला सामने आने के बाद जहां मानक के विपरीत लिपिक से बीपीएम बनाए गए आदेश कुमार के खिलाफ कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। वहीं आयकर विभाग अब फर्जी फर्मों पर शिकंजा कसने की तैयारी में है।
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जिला स्वास्थ्य समिति की 11 जून को हुई बैठक में स्वास्थ्य मिशन योजना में गड़बड़ी होने का मामला प्रकाश में आया था। इस पर पांच सदस्यीय टीम ने विभागीय जांच शुरू की। जांच में तत्कालीन सीएमएस डॉ. राजीव रस्तोगी व बीपीएम आदेश कुमार द्वारा वित्तीय अनियमितता किए जाने के मामले सामने आए। जांच टीम ने 31 अगस्त को रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंप दी थी।
जिन फर्मों के नाम भुगतान किया गया, उनका न तो जीएसटी में पंजीयन है और न ही यह फर्म कार्य कर रही हैं। फर्मों के जीएसटीआईएन व यूआईएन नंबर व पते भी फर्जी मिले। लिपिक पर मुकदमा दर्ज कराने के बाद अब करोड़ों के घालमेल में शामिल फर्मों पर शिकंजा कसा जा रहा है। विभागीय सूत्र बताते हैं कि फर्मों पर भी कार्रवाई की जाएगी। आयकर विभाग ने भी इसे संज्ञान में लिया है।
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ऐसा हुआ एक के बाद एक घोटाला
- चिचौली अस्पताल के लिए आवंटित बजट 5,74644 के सापेक्ष 6,28469 रुपये व्यय किए गए।
- वित्तीय वर्ष 2020-21 में 1,6789854 रुपये के सापेक्ष 60 बिलों का भुगतान।
- वाशिंग मशीन के नाम पर 8,94600 का भुगतान तीन फर्मों को किया गया।
- जननी सुरक्षा योजना के तहत 2,98800 रुपये के भुगतान का रिकार्ड गायब।
- राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत वित्तीय वर्ष 2020-21 में प्राप्त बजट तीन करोड़ तीस लाख के सापेक्ष तीन करोड़ 35 लाख 87 हजार एक सौ दो रुपये व्यय किया गया।
- एक लाख से अधिक के बिलों का बिना स्वीकृति और टेंडर के भुगतान किया गया।
नियमों को ताक पर रखकर इन्हें किया भुगतान
- कोविड-19, एसएनसीयू, आरकेएस के तहत होने वाले व्यय का खर्च दिखाकर काली इंटर प्राइजेज उन्नाव, जेप कंप्यूटर सेल्स एंड सर्विस, नमन इंटर प्राइजेज, शिवांगी इंटर प्राइजेज, नमन पेट्रो एंड केमिकल सर्विसेज, ऐटम साइंस से कोटेशन एवं निविदा आमंत्रित किए बगैर ही भुगतान किया गया। इसके साथ ही इन्हीं फर्मों से चिकित्सालय की सफाई, इलेक्ट्रानिक सामग्री, उपकरण, टोनर रिफलिंग, मास्क, सैनिटाइजर आदि कार्य व खरीद की गई। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत किए गए भुगतान ऑपरेशनल गाइडलाइंस फॉर फाइनेंशियल मैनेजमेंट में दी गई व्यवस्थाओं को संज्ञान में लेकर नहीं किए गए।
चुप्पी साधे रहे अफसर
कोरोना काल के दौरान तत्कालीन सीएमएस और बीपीएम अपनी मर्जी से लाखों की खरीद फरोख्त करते रहे। इसकी भनक जिले के अफसरों को नहीं हुई। जबकि सबसे खास बात यह है कि कोरोना काल में एक-एक खरीद और कार्यों की मानीटरिंग की जाती है। फर्जी फर्मों को करोड़ों का भुगतान होने के बाद भी सीएमओ को भनक नहीं लगी। पांच सदस्यीय टीम की जांच में मामला खुलता चला गया तो जिले के स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। कई अफसर एक दूसरे को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। वहीं कुछ ने तो बंदरबांट के खेल में सब कुछ उजागर होने की बात कही है।
जांच में खुलेंगे कई राज
कोरोना काल में मास्क, सैनिटाइजर, संक्रमित को लाने व ले जाने, इलाज, दवा से लेकर तमाम मदों में सरकार ने बजट दिया। शासन की मंशा थी कि लोगों की महामारी से जान बच सके, लेकिन खाऊ कमाऊ नीति के कारण सरकारी बजट में खूब बंदरबांट हुआ। सूत्र बताते हैं कि कोरोना काल में की गई कई खरीद के मामले में गड़बड़ी हैं। मानकों की अनदेखी की गई है। शासन से सही से जांच हुई तो कई राज खुलेंगे।
वित्तीय अनियमितताओं के मामले में विभाग को सूचना दी गई है। जांच कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। फर्मों की जांच के लिए आयकर विभाग को भी सूचना उच्चाधिकारियों के माध्यम से दी जाएगी। अब पुलिस अपने स्तर से कार्रवाई करेगी।- डॉ. अर्चना श्रीवास्तव, सीएमओ
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